पुलिस का सम्मान, किसान और डेयरी संचालकों ने भेंट किया दूध-घी

पुलिस का सम्मान, किसान और डेयरी संचालकों ने भेंट किया दूध-घी

जबलपुर| संदीप कुमार| Jabalpur News कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण काल मे अपने घरों से बाहर रहकर आम जन को घरों में रहने की सलाह देने वाली बरेला पुलिस का आज स्थानीय लोगो ने अनूठा स्वागत किया है। पुलिस की मेहनत को देखते हुए किसान और डेरी संचलको सहित ग्रमीणों ने बरेला थाना पहुँचकर न सिर्फ डीएसपी और थाना प्रभारी सहित स्टाफ का सम्मान किया बल्कि सम्मान स्वरूप उन्हें 1 किलो दूध और 1 किलो घी भी भेंट किया इसके अलावा किसानों ने पुलिस की सुरक्षा के लिए मास्क और सैनिटाइजर भी दिया।

किसानों से सम्मान पाकर पुलिस के चेहरे खिल उठे। थाना प्रभारी सुशील चौहान ने पुलिस को मिले इस सम्मान का हाथ जोड़कर शुक्रिया अदा किया।बरेला के स्थानीय लोगों का कहना है कि कोरोना वायरस के संकट काल में पुलिस दिन रात हमारे क्षेत्र में रहने वाले लोगों की मदद करते हुए उनका कवच बनी हुई है। जबलपुर में बीते 2 महीनों से वायरस का संक्रमण है ऐसे में हमारा बरेला क्षेत्र जो कि अभी तक कोरोना वायरस से बचा हुआ है इसका पूरा श्रेय बरेला पुलिस को जाता है। आज बरेला सालीवाडा,गौर में रहने वाले स्थानीय लोगों के साथ किसान और डेयरी संचालकों ने पुलिस का मान बढ़ाने के लिए दूध और घी भेंट किया है इसके अलावा पुलिस को मास्क और सेनिटाइजर भी दिए। किसानों से सम्मान पाकर पुलिस अपने आपको फक्र में महसूस कर रही थी।थाना प्रभारी सुशील चौहान ने पुलिस के का किया सम्मान देखकर सभी को धन्यवाद दिया है साथ ही भरोसा दिलाया है कि जैसे अभी तक कोरोना वायरस से उनकी रक्षा की गई है आगे भी यह सुरक्षा जारी रहेगी।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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