22 फरवरी से होने वाले नर्मदा गौ कुम्भ की तैयारीअंतिम पड़ाव में

22 फरवरी से होने वाले नर्मदा गौ कुम्भ की तैयारीअंतिम पड़ाव में

जबलपुर। संदीप कुमार।

जबलपुर के नर्मदा तट ग्वारीघाट में 24 फरवरी से 3 मार्च तक मध्य प्रदेश सरकार द्वारा नर्मदा गौ कुंभ आयोजित किया जा रहा है। इस नर्मदा गो कुंभ को भव्य स्वरूप देने के लिए तैयारियां जोरों पर है। इसी सिलसिले में आज कलेक्टर कार्यालय में एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बातचीत करते हुए इन प्रतिनिधियों ने अपना पूरा सहयोग देने का वादा किया। धार्मिक और सामाजिक संगठन के द्वारा नर्मदा कुंभ के दौरान विभिन्न धार्मिक आयोजन,नर्मदा पर चित्र प्रदर्शनी और नाटक का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही भजन गायकों की मंडली प्रत्येक शाम को भजनों की प्रस्तुति देगी।

कुछ सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बताया उनके वॉलिंटियर्स भक्त जनों के आने-जाने की व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने में अपना पूरा सहयोग देंगे। इसके साथ ही बड़े संगठनों के द्वारा भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। जिसमें सभी श्रद्धालुओं को दोपहर और रात का खाना निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा।

स्थानीय लोगों ने बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए अपने घरों मे व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है,कलेक्टर भरत यादव ने सभी संगठनों के प्रतिनिधियों के द्वारा दिए गए सुझाव पर अमल करने का भरोसा दिलाया उन्होंने बताया कि इस दौरान आने वाले गणमान्य व्यक्तियों मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के आने और जाने के लिए अलग से व्यवस्था की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी नहीं उठाना पड़ेगी. मध्य प्रदेश शासन के द्वारा आयोजित इस नर्मदा गौ कुंभ में लगभग पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालु के आने की उम्मीद जताई जा रही है।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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