जबलपुर को फ़िल्म सिटी बनाने की तैयारी, भाजपा ने उठाये सवाल

जबलपुर को फ़िल्म सिटी बनाने की तैयारी, भाजपा ने उठाये सवाल

जबलपुर। संदीप कुमार।
बुंदेलखंड में फ़िल्म बनाए जाने का एक क्रेज लंबे समय से चला पर अब महाकौशल में भी फ़िल्म सिटी बनाने को जोर दिया जा रहा है जिसको लेकर पर्यटन विभाग ने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है।पर्यटन विभाग ने करीब छह लाख रु खर्च कर फ़िल्म लाइन के जाने माने निर्माता-निर्देशक को जबलपुर आने का न्योता दिया है। हालांकि पर्यटन विभाग के इस कार्यक्रम पर भारतीय जनता पार्टी ने उंगुली उठाना शुरू कर दिया है।

टूरिज्म एवं प्रमोशन कौंसिल के सीईओ हेमंत कुमार ने बताया कि एक अच्छी फिल्म के लिए जो लोकेशन होना चाहिए वो सब कुछ जबलपुर में है यही वजह है कि फ़िल्म इंडस्ट्री के कई निर्माता निर्देशको को जबलपुर जिला फ़िल्म बंनाने के लिए पसन्द आ रहा है।मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग ने करीब 26 निर्माता निर्देशको को जबलपुर बुलाया है जो कि यहाँ आकर अपनी फिल्म के लिए लोकेशन देखेंगे और कोशिश करेंगे कि वह जबलपुर में अपनी फिल्मों को तैयार करे।

पर्यटन विभाग का मानना है किबजबलपुर में फ़िल्म सिटी बनने से यहाँ के लोगो को न सिर्फ रोजगार मिलेगा बल्कि जबलपुर जिले का नाम देश मे होगा।पर्यटन विभाग करीब छह लाख रु इस कार्यक्रम को लेकर खर्च कर रहा है पर इस छह लाख में से पाँच लाख रु निर्माता-निर्देशको के आने जाने पर ही खर्च हो जाएगा जिस पर की भाजपा ने सवाल उठाना शुरू कर दिए है।पर्यटन विभाग के इस कार्यक्रम में भाजपा ने आपत्ति जताते हुए कहा है कि ये कार्यक्रम जबलपुर के लिए नही बल्कि अधिकारी अपने बच्चो और परिजनों के प्रमोशन के लिए ये सब कर रहे है।क्योकि फ़िल्म निर्माता-निर्देशक अगर जबलपुर आएंगे तो उनसे मिलने के लिए अधिकारियों के परिवार वाले ही सबसे आगे रहते है।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews