मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण मामले पर आज मंगलवार को एमपी हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में सुनवाई हुई जिसमें राज्य सरकार ने अपना जवाब पेश किया इसमें पुरानी और नई प्रमोशन पॉलिसी में अंतर बताया लेकिन याचिकाकर्ताओं ने अधूरा जवाब पेश करने का आरोप लगाया और इसका जवाब देने के लिए समय की मांग की जिसके बाद कोर्ट ने अगले सप्ताह सुनवाई की तारीख दे दी।

भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि हाई कोर्ट पहले ही साल 2002 के प्रमोशन नियमों को आरबी राय केस में रद्द कर चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने नए सिरे से वही नीति लागू कर दी जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और वहां यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी है।

सरकारी वकील ने सुनवाई की तारीख बढ़ाने की मांग की 

सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट सीएस वैधनाथन उपस्थित हुए और कोर्ट को कहा कि केस की सुनवाई को इसलिए आगे बढ़ाया जाए क्योंकि सरकार की तरफ से जो ओरल अंडरटेकिंग दी गई है, जिसकी वजह से प्रमोशन नहीं हो पा रहा है, उस वजह से आरक्षित और अनारक्षित वर्गों को नुकसान हो रहा है।

सरकार ने सोमवार शाम पेश किया जवाब 

चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान यह पाया कि सरकार को जबाव पहले पेश करना था, वो सोमवार की शाम को फाइल किया है, जिस पर याचिकाकर्ताओं की तरफ से कोर्ट से समय मांगा गया, ताकि सरकार की रिप्लाय का अध्ययन कर दलील रख सकें।

याचिकर्ताओं ने लगाये ये आरोप 

याचिकर्ताओं ने आरोप लगे अकी सरकार ने क्रीमी लेयर, क्वांटिफायबल डेटा पर जवाब नहीं दिया है, दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुनवाई के लिए अगले सप्ताह की तारीख तयकर दी, माना जा रहा है कि 16 सितम्बर को कोर्ट अंतरिम राहत पर कोई फैसला ले सकती है।

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जबलपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट