Fri, Jan 9, 2026

SECL बंद खदान हादसा: 85 दिन बाद मिला अनिल कुशवाहा का शव, हाईकोर्ट के आदेश पर राहत

Written by:Bhawna Choubey
Published:
जबलपुर के SECL सोहागपुर एरिया की बंद खदान में डूबे टिपर चालक अनिल कुशवाहा का शव 85 दिन बाद निकाला गया। हाईकोर्ट के सख्त निर्देश, पत्नी की लड़ाई और सिस्टम की लापरवाही ने इस हादसे को बड़ा सवाल बना दिया।
SECL बंद खदान हादसा: 85 दिन बाद मिला अनिल कुशवाहा का शव, हाईकोर्ट के आदेश पर राहत

जबलपुर से जुड़ी यह खबर सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही, मजदूर की मजबूरी और इंसाफ के लिए एक पत्नी की लंबी लड़ाई की कहानी है। SECL की 15 साल से बंद पड़ी खदान में काम के दौरान डूबे टिपर चालक अनिल कुशवाहा का शव आखिरकार 85 दिन बाद निकाला जा सका। यह वही इंतजार था, जो हर गुजरते दिन के साथ परिवार पर और भारी होता गया।

हादसे के बाद प्रशासन ने मुआवजा देकर मामले को समाप्त मान लिया, लेकिन पत्नी आरती कुशवाहा के लिए यह सिर्फ पैसों का सवाल नहीं था। उनके लिए पति का शव, अंतिम संस्कार और सच्चाई सामने आना सबसे बड़ा मुद्दा था। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आया।

क्या है पूरा मामला

यह मामला 11 अक्टूबर 2025 का है। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के सोहागपुर एरिया में SECL की एक खदान में मऊगंज निवासी अनिल कुशवाहा ठेके पर टिपर चालक के रूप में काम कर रहे थे। अनिल एक निजी कंपनी RKTC के लिए काम करते थे, जिसे SECL के तहत काम का ठेका मिला हुआ था।

भारी बारिश के बावजूद अनिल को उस खदान में काम पर भेजा गया, जो करीब 15 साल से बंद पड़ी थी। नियमों के अनुसार, किसी भी बंद खदान की क्लोजर रिपोर्ट बनना जरूरी होती है, जिसका मतलब है कि वहां किसी भी तरह का काम पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। इसके बावजूद खदान में मिट्टी भराई का काम कराया जा रहा था। काम के दौरान अचानक मिट्टी धंस गई और अनिल कुशवाहा टिपर समेत पानी से भरी गहरी खदान में समा गए। देखते ही देखते अनिल लापता हो गए और उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

रेस्क्यू ऑपरेशन की नाकामी और 85 दिन का इंतजार

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, प्रशासन और SDRF की टीम मौके पर पहुंची। शुरुआती दिनों में शव और टिपर की तलाश की गई, लेकिन खदान में करीब 40 फीट गहरा पानी भरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन सफल नहीं हो सका।

यह सवाल लगातार उठता रहा कि जब एक कर्मचारी लापता था, तो रेस्क्यू को इतनी जल्दी क्यों रोक दिया गया। कुछ ही दिनों बाद प्रशासन ने अनिल कुशवाहा को मृत मानते हुए डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया और 25 लाख रुपये की मुआवजा राशि तय की गई, जिसे SECL या ठेका कंपनी द्वारा दिया गया।

हालांकि, शव का न मिलना परिवार के लिए सबसे बड़ा दर्द बना रहा। हर गुजरते दिन के साथ पत्नी आरती कुशवाहा की उम्मीदें और सवाल दोनों बढ़ते चले गए। पूरे 85 दिनों तक बंद खदान में पानी भरा रहा और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

हाईकोर्ट में पत्नी की याचिका और न्याय की उम्मीद

पति का शव पाने के लिए आरती कुशवाहा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने याचिका में कहा कि वे हिंदू रीति-रिवाज से अपने पति का अंतिम संस्कार करना चाहती हैं और इसके लिए शव या कम से कम अवशेष उन्हें सौंपे जाएं।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कंपनी की ओर से आश्वासन दिया गया था कि 60 दिनों के भीतर शव निकाल लिया जाएगा, लेकिन तय समय बीतने के बाद भी कुछ नहीं हुआ। दिसंबर के दूसरे सप्ताह में हुई सुनवाई में आरती कुशवाहा ने कोर्ट को बताया कि यदि पूरा शव नहीं मिलता, तो कम से कम अवशेष ही दे दिए जाएं, ताकि अंतिम संस्कार किया जा सके। मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने बंद पड़ी खदान से पानी निकालने के स्पष्ट निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और बड़े पैमाने पर खदान से पानी निकालने का काम शुरू किया गया।

पानी निकलने के बाद मिला शव

लगातार प्रयासों के बाद जब खदान से पानी पूरी तरह निकाला गया, तो भीतर डूबा हुआ टिपर दिखाई दिया। इसके कुछ समय बाद अनिल कुशवाहा का शव भी बरामद कर लिया गया। शव मिलने के समय मृतक के परिजन, SECL के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे। करीब 85 दिनों के लंबे इंतजार के बाद परिवार को अपने सवालों का जवाब तो मिला, लेकिन यह जवाब एक ऐसे दर्द के साथ आया, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

आज होगा अंतिम संस्कार

अनिल कुशवाहा का अंतिम संस्कार आज उनके गृह क्षेत्र मऊगंज के ग्राम खजुरान में किया जाएगा। गांव में शोक का माहौल है और हर आंख नम है। पत्नी आरती कुशवाहा की यह लड़ाई अब कई सवाल छोड़ गई है, जो खदान सुरक्षा, ठेका प्रणाली और मजदूरों की जान की कीमत पर सीधे चोट करती है।