मुंबई से चली श्रमिक ट्रेन के मुसाफिरों की मंजिल अब भी है दूर, घर की बजाय जाएंगे रीवा

मुंबई से चली श्रमिक ट्रेन के मुसाफिरों की मंजिल अब भी है दूर, घर की बजाय जाएंगे रीवा

जबलपुर/संदीप कुमार

कोरोना वायरस के कारण जारी लॉक डाउन में आज भी हजारों मजदूर दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं, जिन्हें वापस लाने के लिये अब राज्य सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। इसी कड़ी में बधवार को मध्यप्रदेश सरकार की मदद से रेल्वे मुम्बई में फंसे करीब 1200 यात्रियों को लेकर एक ट्रेन जबलपुर पहुंची। मध्यप्रदेश की सीमा में दाखिल हुए ये सभी लोग मुम्बई में मजदूरी किया करते थे, जो 40 दिनों से लॉक डाउन में वहां फंसे हुए थे।

खंडवा-बड़वानी के यात्री पहुँचे जबलपुर, अब जाएंगे रीवा
मुंबई के पनवेल से चलकर बुधवार दोपहर जबलपुर पहुंची ट्रेन में यात्रा करने वालों ने श्रमिक ट्रेन की हकीकत बयां की। खंडवा-बड़वानी-धार जिले के सेंकड़ों लोग, जिन्हें उम्मीद थी कि ये ट्रेन उन्हें उनके घर तक पहुंचाएगी, लेकिन असल में ऐसा नहीं है। ये ट्रेन उन्हें रीवा ले जाकर छोड़ देगी जबकि सफर करने वाले यात्रियों का कहना था कि जब हम ट्रेन में बैठ रहे थे तब भी पूछा था कि हमें खंडवा-बड़वानी-धार जाना है। लेकिन जब ट्रेन हमारे स्थान पर पहुँची तो वहाँ पर हमें उतरने नही दिया गया। ऐसे में अब हम रीवा जाकर अपने परिवार और बच्चों के साथ कहा रहेंगे, ये चिंता का विषय है।

स्टेशन में रेल्वे ने की यात्रियों के लिए खाने पीने की व्यवस्था
हालांकि इस बीच रेल्वे ने जबलपुर स्टेशन में आने वाली श्रमिक ट्रेन के यात्रियों के लिए खाने पीने की व्यवस्था जरूर कर रखी थी। रेल्वे ने ट्रेन में सफर करने वाले हर व्यक्ति के लिए खाने के पैकेट और पीने के पानी की व्यवस्था की। लेकिन सवाल फिर भी यही है कि मुंबई से निकलने के बाद भी अगर ये मुसाफिर अपने घर नहीं पहुंच पाते हैं तो आखिर उनके लौटने का फायदा क्या हुआ।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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