बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था के लिए जिम्मेदार सिग्नल को लेकर हाई कोर्ट ने दिखाई सख्ती, सरकार को दिए निर्देश

कोर्ट को बताया गया कि 21 में से 6 ट्रैफिक सिग्नल को स्मार्ट सिटी जबलपुर चला रहा है, 5 सिग्नल को नगर निगम देख रहा है, जबकि बाकी के 10 सिग्नल का मैनेजमेंट मध्यप्रदेश पुलिस के पास है।
MP High Court

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जबलपुर शहर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था के लिए जिम्मेदार सिग्नल को लेकर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। नागरिक उपभोक्ता मंच की और से दायर जनहित याचिका पर शुक्रवार को अदालत में सुनवाई हुई, जिसमें राज्य सरकार की और से बताया गया कि जबलपुर में 21 सिग्नल ट्रैफिक को कंट्रोल करने के लिए लगाए गए है, जिसमें से 20 चालू कर दिए गए है, एक सिग्नल जो कि दमोह नाका चौराहे पर लगा हुआ है, वह इसलिए शुरू नहीं हो पाया कि वहां पर फ्लाईओवर ब्रिज का काम चल रहा है।

कोर्ट ने राज्य सरकार के इस जवाब पर माना कि याचिका में जो चाहा गया था, वह पूरा हो गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष यह बात भी रखी कि शहर में जो 21 सिग्नल लगे हुए है, उनको कंट्रोल करने की जिम्मेदारी तीन अलग-अलग एंजेसियों को है, जिसके चलते समन्वय नहीं बन रहा है।

अलग अलग एजेंसियों पर ट्रेफिक सिग्नल की जिम्मेदारी 

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि 21 में से 6 ट्रैफिक सिग्नल को स्मार्ट सिटी जबलपुर चला रहा है, 5 सिग्नल को नगर निगम देख रहा है, जबकि बाकी के 10 सिग्नल का मैनेजमेंट मध्यप्रदेश पुलिस के पास है।

कोर्ट ने सिग्नल व्यवस्था ठीक करने के निर्देश दिए 

कोर्ट का मत है कि अलग-अलग एजेंसी के मैनेजमेंट से एकरूपता नहीं रहेगी, और हमेशा परेशानी बनी रहेगी। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए है कि इस पर विचार करे, और बेहतर यह होगा कि तीन में से किसी एक विभाग को ट्रैफिक कंट्रोल करने दिया जाए, जिससे कि लोगों को अनावश्यक रूप से हर चौराहे पर खड़ा ना होना पड़े। क्योंकि अगर एक एजेंसी सिग्नल को कंट्रोल करेगी तो एक सिग्नल पर जब ग्रीन होगा, और उसे पार करने के बाद जब अगले सिग्नल पर व्यक्ति जाएगा, तो उसे वहां पर भी ग्रीन सिग्नल ही मिलेगा, जिससे कि ट्रैफिक व्यावस्था में सुधार होगा और जाम की स्थिति नहीं बनेगी।

मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को 

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में उपमहाधिवक्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने कोर्ट के तर्क पर सहमति जताते हुए इसे उचित माना और जल्द ही सरकार को निर्देश देते हुए अगली सुनवाई पर कोर्ट को अवगत करवाया जाएगा। मामले पर अगली सुनवाई अब 29 जुलाई को तय की गई है।

Atul Saxena
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पत्रकारिता में तीन दशक से अधिक का अनुभव.

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena →
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