किसानों की परेशानी: फसल कटने को तैयार, मजदूरों का टोटा

किसानों की परेशानी: फसल कटने को तैयार, मजदूरों का टोटा

जबलपुर में बीते 15 दिन से कोरोना वायरस संक्रमण को देखते हुए लॉक डाउन है। लोग घरों से निकल नही पा रहे है और जो जाता है तो उस पर पुलिस प्रशासन की नजर रहती है। बात करे अगर रबी सीजन की फसल की तो वह पककर तैयार हो गई है लेकिन लॉक डाउन के चलते फसल काटने के लिए मजदूर नही मिल रहे है और न ही खड़ी फसल निकालने को हार्वेस्टर। हालांकि किसानों की फसलों को देखते हुए कलेक्टर ने हार्वेस्टर की अनुमति दे दी है पर कोरोना वायरस के खोफ से हार्वेस्टर भी आसानी से नही मिल रहे है।

फसल काटने को नही मिल रहे है मजदूर.……
बड़ी मुश्किल से चंद मजदूर फसल काटने को मिले तो जरूर पर वो भी कोरोना वायरस के चलते कभी कभार ही खेतो में आ रहे है।अगर समय रहते गेंहू की फसल नही काटी गई तो किसानों की मेहनत में पानी फिर जाएगा।
पकी फसल को लेकर किसानों ने कही ये बाते….
गेहूं की फसल पक गई है लेकिन कोरोना वायरस के संक्रमण से सुरक्षा के चलते खेतो में मजदूर नहीं आ रहे हैं ऐसे में गेहूं की फसल सूखती जा रही है वहीं दूसरी और खड़ी फसल को गहने के लिए हर साल आने वाले हार्वेस्टर और थे थ्रेसर भी इस साल लॉक डाउन के कारण अब तक नहीं आए हैं।

Gaurav Sharma
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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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