बुधवार को ट्विशा शर्मा केस (Twisha Sharma) को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में सास गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत को लेकर करीब ढाई घंटे तक सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है। जल्द ही आदेश भी जारी किया जाएगा। मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह की ओरअग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई है।
प्रशांत सिंह ने आरोप लगाए हैं कि गिरिबाला सिंह जमानत की शर्तों का पालन नहीं कर रही हैं। उन्हें जब भी नोटिस भेजा गया तो, नोटिस तामील होने में समस्या खड़ी की गई। उन्होंने जांच को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए हैं। सीनियर एडवोकेट तुषार मेहता ने भी अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि, “जमानत बहुत जल्दबाजी में दी गई है।”
याचिका में प्रशासन के साथ CBI भी शामिल
ट्विशा शर्मा की ओर से पक्ष रख रहे वकील अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि गिरिबाला सिंह की अग्रिम को लेकर दो मोर्चों पर चुनौती की गई है। पहली याचिका ट्विशा के परिवार द्वारा दायर की गई थी। दूसरी याचिका प्रशासन द्वारा की गई थी। लेकिन अब सीबीआई के हाथों में सौंपी गई है। बुधवार को सीबीआई ने खुद इस कार्यवाही में औपचारिक रूप से अपना नाम शामिल करने का अनुरोध किया है। जिसके बाद सरकार द्वारा मूल रूप से दायर याचिका में प्रशासन के साथ-साथ सीबीआई का नाम भी जोड़ दिया गया है।
समर्थ सिंह सीबीआई रिमांड पर
बुधवार को SIT ने ट्विशा शर्मा के पति समर्थ सिंह को कोर्ट में पेश करने के बाद सीबीआई को सौंप दिया है। वह 29 मई तक सीबीआई रिमांड पर ही रहेंगे। जिसके बाद समर्थ सिंह के साथ सीबीआई की एक टीम जांच के लिए गिरिबाला सिंह के आवास पर पहुंची। 3D स्कैनर का इस्तेमाल करके तस्वीरों को कैप्चर किया। क्राइम सीन को भी फिर से दोहराया गया।






