Jabalpur: “रामचरितमानस को संसद में घोषित करें राष्ट्रग्रंथ” वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में CM डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में जगद्गुरु रामभद्राचार्य की मांग

जबलपुर के मानस भवन में तीन दिवसीय वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का आगाज हुआ, जिसमें 12 देशों के शोधकर्ता शामिल हुए हैं। कार्यक्रम में जगतगुरु रामभद्राचार्य ने रामचरितमानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करने की मांग की और पाकिस्तान को लेकर कड़े बयान दिए।
Jabalpur: “रामचरितमानस को संसद में घोषित करें राष्ट्रग्रंथ” वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में CM डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में जगद्गुरु रामभद्राचार्य की मांग

मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में तीन दिवसीय ‘वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस’ का भव्य शुभारंभ हुआ है। मानस भवन में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत विशेष रूप से शामिल हुए। कार्यक्रम में देश-विदेश के विद्वानों के साथ-साथ तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य महाराज ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस कॉन्फ्रेंस में संस्कृति मंत्री और लोक निर्माण मंत्री भी मौजूद रहे। आयोजन का मुख्य आकर्षण 12 देशों से आए शोधकर्ता हैं, जो रामायण के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार और शोध प्रस्तुत करेंगे। यह कॉन्फ्रेंस 2 जनवरी से शुरू होकर 4 जनवरी तक चलेगी।

रामचरितमानस को राष्ट्रग्रंथ घोषित करने की मांग

कार्यक्रम के दौरान जगतगुरु रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में एक बड़ी मांग रखी। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया कि ‘रामचरितमानस’ को संसद में प्रस्ताव लाकर ‘राष्ट्रग्रंथ’ घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी ‘रघुपति राघव राजा राम’ के शब्द इसी ग्रंथ से लिए थे।

“राष्ट्र का मंगल ही राम का असली अर्थ है। जिससे राष्ट्र का कल्याण हो, वही राम हैं।” — स्वामी रामभद्राचार्य

‘ओम् शांति’ नहीं, अब ‘ओम् क्रांति’ का हो नारा

स्वामी रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर भी बेबाक राय रखी। उन्होंने पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए बताया कि इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे चर्चा की थी। रामभद्राचार्य ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी को पाकिस्तान को दंड देने की सलाह दी थी।

उन्होंने रामायण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि हनुमान जी ने भी कहा था, ‘जिन्ह मोहि मारा तिन्ह मैं मारे’। वहीं, भगवान राम का कथन है- ‘भय बिनु होई न प्रीति’। इसी संदर्भ में उन्होंने एक नया नारा देते हुए कहा कि अब समय ‘ओम् शांति’ का नहीं, बल्कि ‘ओम् क्रांति’ का है।

कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी रामायण के महत्व और भारतीय संस्कृति में इसके स्थान पर अपने विचार व्यक्त किए। यह आयोजन अगले दो दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें रामायण के वैश्विक प्रभाव पर विस्तृत चर्चा होगी।

Banshika Sharma
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कंटेंट राइटर

मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma →
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