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देवी अहिल्या विश्वविद्यालय झाबुआ में 1200 करोड़ की लागत से खोलेगा मेडिकल कॉलेज, सरकार से मिला ग्रीन सिग्नल, 2026 से पढ़ाई शुरू करने की तैयारी

Written by:Banshika Sharma
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इंदौर का देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) अब झाबुआ में अपना मेडिकल कॉलेज स्थापित करेगा। राज्य सरकार से अनिवार्यता प्रमाण पत्र मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने NMC को आवेदन भेज दिया है। 1200 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के तहत 2026 से एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने का लक्ष्य है, जिससे आदिवासी अंचल में स्वास्थ्य और शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय झाबुआ में 1200 करोड़ की लागत से खोलेगा मेडिकल कॉलेज, सरकार से मिला ग्रीन सिग्नल, 2026 से पढ़ाई शुरू करने की तैयारी

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) का मेडिकल कॉलेज खोलने का करीब 25 साल पुराना सपना अब साकार होने की राह पर है। राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को हरी झंडी दे दी है और अनिवार्यता प्रमाण पत्र (Essentiality Certificate) भी जारी कर दिया है। इसके तुरंत बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) में कॉलेज की मान्यता के लिए आवेदन जमा कर दिया है।

यह प्रोजेक्ट पहले इंदौर में प्रस्तावित था, लेकिन जमीन की कमी के कारण सालों से अटका हुआ था। अब इसे आदिवासी बहुल जिले झाबुआ में स्थापित किया जाएगा, ताकि क्षेत्र में उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाया जा सके।

इंदौर से झाबुआ क्यों शिफ्ट हुआ प्रोजेक्ट?

विश्वविद्यालय ने साल 2001 में इंदौर के छोटा बांगड़दा में मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन चिन्हित की थी। शुरुआत में यूनिवर्सिटी के पास 50 एकड़ जमीन थी, लेकिन विभिन्न कारणों से अब यह घटकर मात्र 12 एकड़ रह गई है। यह जमीन मेडिकल कॉलेज के मानकों को पूरा करने के लिए अपर्याप्त थी, जिस वजह से यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया था।

कुलपति प्रो. राकेश सिंघई की पहल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की विशेष रुचि के बाद इस प्रोजेक्ट को पिछड़े आदिवासी क्षेत्र में ले जाने का फैसला किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य झाबुआ और आसपास के आदिवासी अंचल के छात्रों को अपने ही क्षेत्र में डॉक्टर बनने का अवसर देना और जिला अस्पतालों को विशेषज्ञ डॉक्टरों से जोड़ना है।

1200 करोड़ का मेगा प्लान: 2026 से शुरू हो सकती है पढ़ाई

विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि अगले शैक्षणिक सत्र (2026) से ही एमबीबीएस की सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी जाए। शुरुआती दौर में कॉलेज का संचालन झाबुआ स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) के यूआईटी भवन में किया जाएगा। इसके लिए डीएवीवी द्वारा आरजीपीवी को 60 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दी जाएगी।

भविष्य में इस कॉलेज के लिए 100 एकड़ जमीन पर एक विशाल और आधुनिक कैंपस विकसित करने की योजना है। इस 1200 करोड़ के मेगा प्लान के तहत एमबीबीएस के बाद बीडीएस, आयुर्वेदिक और होम्योपैथी जैसे पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे।

“इस कॉलेज के खुलने से जिला अस्पतालों को विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम और आधुनिक संसाधन मिलेंगे। कॉलेज और अस्पताल के कारण क्षेत्र में बाजार और रोजगार की नई संभावनाएं भी पैदा होंगी। आदिवासी अंचल के मेधावी छात्र अपने ही क्षेत्र में रहकर डॉक्टर बन सकेंगे।” — प्रो. राकेश सिंघई, कुलपति, डीएवीवी

इंदौर की जमीन का क्या होगा?

झाबुआ में प्रोजेक्ट शिफ्ट होने के बाद अब इंदौर के छोटा बांगड़दा की 12 एकड़ जमीन का भविष्य अधर में है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह जमीन केवल चिकित्सा शिक्षा के लिए ही आरक्षित है। यदि विश्वविद्यालय यहां बी.आर्क या बी.डिजाइन जैसे कोई अन्य कोर्स शुरू करना चाहता है, तो इसके लिए उसे दोबारा राज्य सरकार से विशेष अनुमति लेनी होगी।

Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
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