हिमाचल प्रदेश में वित्तीय संकट गहराता जा रहा है। इसका ताजा असर कृषि उपज विपणन समिति (APMC) के चेयरमैन के मानदेय पर पड़ा है। प्रदेश सरकार ने चेयरमैन का मानदेय लगभग तीन गुना से भी ज्यादा, यानी 24 हजार से 80 हजार रुपये प्रतिमाह करने के प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यह फैसला 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद करने की सिफारिश के बाद लिया गया है, जिससे राज्य में ‘वित्तीय आपातकाल’ जैसी स्थिति बन गई है।
मार्केटिंग बोर्ड ने सरकार को यह प्रस्ताव भेजकर दलील दी थी कि APMC चेयरमैन की जिम्मेदारियों को देखते हुए मानदेय में वृद्धि जरूरी है। दिलचस्प बात यह है कि एक महीने पहले तक सरकार इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाए हुए थी और लगभग 60 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी के लिए सैद्धांतिक सहमति भी दे चुकी थी।
RDG के झटके ने तोड़ा सपना
सूत्रों के मुताबिक, सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन इसी बीच केंद्र से RDG बंद होने की खबर ने पूरी तस्वीर बदल दी। हिमाचल पहले से ही भारी कर्ज और सीमित संसाधनों से जूझ रहा है। ऐसे में RDG के झटके ने सरकार को कड़े वित्तीय अनुशासन वाले फैसले लेने पर मजबूर कर दिया है। इसी के तहत मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव को रोक दिया गया।
“सरकार ने एपीएमसी चेयरमैन के मानदेय को बढ़ाने के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है।” — सी पालरासू, कृषि सचिव, हिमाचल प्रदेश
लग्जरी गाड़ियों पर पहले ही घिरी थी सरकार
यह मामला इसलिए भी तूल पकड़ रहा है क्योंकि मानदेय बढ़ाने की चर्चा से पहले ही APMC चेयरमैन के लिए महंगी स्कॉर्पियो-एन गाड़ियां खरीदी गई थीं। इस पर सोशल मीडिया पर सरकार और मार्केटिंग बोर्ड की काफी किरकिरी हुई थी। लोगों का गुस्सा तब और भड़क गया जब हाल ही में प्रधान सचिव (वित्त) देवेश कुमार ने एक प्रेजेंटेशन में खर्चों में कटौती के लिए कई कड़े सुझाव दिए।
इन सुझावों में सभी प्रकार की सब्सिडी बंद करने, विकास कार्य रोकने, डीए फ्रीज करने, कर्मचारियों और पेंशनरों का एरियर रोकने और दो साल से खाली पड़े पदों को खत्म करने जैसी बातें शामिल थीं। एक तरफ ऐसे सुझाव और दूसरी तरफ चेयरमैन के लिए लग्जरी गाड़ियां और मानदेय बढ़ाने की तैयारी, इसे लेकर सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लग रहे हैं।
मंत्रियों-विधायकों पर मेहरबानी, दूसरों के लिए खजाना खाली
विपक्ष और आम लोग इस बात पर भी सवाल उठा रहे हैं कि इसी सरकार ने कुछ समय पहले ही मंत्रियों और विधायकों के वेतन-भत्तों में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। इसके अलावा, विभिन्न बोर्ड-निगमों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों का मानदेय तो चार से पांच गुना तक बढ़ाया गया था। इसी को आधार बनाकर APMC चेयरमैन ने भी अपने मानदेय में वृद्धि की उम्मीद लगाई थी, जो अब टूट गई है।
हिमाचल में किन्नौर और लाहौल-स्पीति को छोड़कर हर जिले में APMC है। वर्तमान में ऊना को छोड़कर 9 APMC में चेयरमैन तैनात हैं, जिनके मानदेय में यह बढ़ोतरी होनी थी।





