केंद्र सरकार से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के बंद होने से हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहे संकट के बादलों के बीच आज मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कैबिनेट की एक महत्वपूर्ण बैठक हो रही है। शिमला स्थित सचिवालय में होने वाली इस बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य की वित्तीय सेहत को पटरी पर लाने के रास्ते तलाशना है।
यह अनुदान राज्य के कुल बजट का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा था, जिसके बंद होने से प्रदेश को सालाना करीब 10 हजार करोड़ रुपये का सीधा नुकसान होगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हिमाचल पहले से ही एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के बोझ तले दबा है।
वित्तीय प्रबंधन और फिजूलखर्ची पर फोकस
सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट में इस बात पर गहन मंथन होगा कि अगर केंद्र सरकार RDG को फिर से बहाल नहीं करती है तो राज्य के पास क्या विकल्प बचते हैं। सरकार इस वित्तीय झटके से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने पर विचार कर सकती है। इसमें सरकारी फिजूलखर्ची पर लगाम लगाना और आय के नए स्रोत विकसित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
कैबिनेट में इस बात पर भी चर्चा होगी कि इस अनुदान को दोबारा शुरू करवाने के लिए केंद्र के समक्ष किस तरह से पक्ष रखा जाए।
बजट सत्र की तारीख होगी तय
वित्तीय संकट के अलावा, इस बैठक में आगामी बजट सत्र को लेकर भी फैसला लिया जाएगा। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होना प्रस्तावित है, लेकिन अभी तक बजट पेश करने की तारीख तय नहीं हुई है।
आज की बैठक में यह तय किया जाएगा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू किस दिन वित्तीय वर्ष 2024-25 का बजट पेश करेंगे। इसके साथ ही, पूरे बजट सत्र में कुल कितनी बैठकें होंगी, इसकी रूपरेखा को भी अंतिम रूप दिया जाएगा। गौरतलब है कि एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी कैबिनेट बैठक है, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाती है।





