Hindi News

हिमाचल प्रदेश में PSU बेचने और लेबर कोड के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल, 15000 बिजली कर्मियों ने काम रोका, बैंकिंग-स्वास्थ्य सेवाएं बाधित

Written by:Banshika Sharma
Published:
केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में आज हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। सीटू के बैनर तले हजारों कर्मचारियों, मजदूरों और किसानों ने शिमला, सोलन समेत कई जिलों में प्रदर्शन किया, जिससे बैंकिंग, बिजली और स्वास्थ्य जैसी जरूरी सेवाएं प्रभावित हुईं।
हिमाचल प्रदेश में PSU बेचने और लेबर कोड के विरोध में राष्ट्रव्यापी हड़ताल, 15000 बिजली कर्मियों ने काम रोका, बैंकिंग-स्वास्थ्य सेवाएं बाधित

केंद्र सरकार की सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) बेचने और नए लेबर कोड लागू करने जैसी नीतियों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर हुई देशव्यापी हड़ताल का हिमाचल प्रदेश में बड़ा असर दिखा। प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसान, मजदूर और कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर आक्रोश रैलियां निकालीं। इस हड़ताल के कारण बैंकिंग, एलआईसी, बिजली और स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं दिनभर प्रभावित रहीं, जिससे आम लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।

शिमला में पंचायत भवन से डीसी ऑफिस तक सैकड़ों की संख्या में कर्मचारी और मजदूर रैली में शामिल हुए। पूरे प्रदेश में लगभग 15 हजार बिजली इंजीनियर व कर्मचारी पेन और टूल डाउन स्ट्राइक पर रहे, जिससे बिजली संबंधी कामकाज ठप रहा।

प्रदेश भर में प्रदर्शन और रैलियां

हड़ताल का असर केवल राजधानी शिमला तक ही सीमित नहीं रहा। ऊना के एमसी पार्क में विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने एकजुट होकर सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। वहीं, बिलासपुर में एटक से संबद्ध मिड डे मील वर्कर्स यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर धरना शुरू कर दिया और चेतावनी दी कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

सोलन के मालरोड पर भी विभिन्न ट्रेड यूनियनों ने एक बड़ी आक्रोश रैली निकाली। इस रैली में शूलिनी ऑटो यूनियन, मिड-डे-मील वर्कर, बैंक कर्मी और नगर निगम सफाई कर्मचारी यूनियन समेत कई संगठनों ने हिस्सा लिया। किसानों ने भी इस हड़ताल को अपना समर्थन दिया। सोलन में सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक ऑटो रिक्शा भी बंद रहे।

क्यों हो रहा है यह विरोध?

सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र के चार नए लेबर कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाले हैं।

“इन कोड्स से यूनियन बनाने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार सीमित हो गए हैं, साथ ही हड़ताल की प्रक्रिया को भी जटिल बनाया गया है। ये कानून ठेका प्रथा को बढ़ावा देंगे, जिससे स्थायी नौकरियों में कमी आएगी और मजदूरों की असुरक्षा बढ़ेगी।” — विजेंद्र मेहरा, प्रदेशाध्यक्ष, सीटू

संगठनों की मांग है कि इन चारों लेबर कोड को तत्काल वापस लिया जाए। इसके अलावा, आउटसोर्स कर्मचारी, 108 एंबुलेंस कर्मी, मनरेगा मजदूर, होटल कर्मी और उद्योग मजदूर भी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल में शामिल हुए।

बिजली क्षेत्र में राष्ट्रव्यापी हड़ताल

इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर बिजली क्षेत्र पर देखने को मिला। हिमाचल पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लोकेश ठाकुर ने बताया कि यह एक दिवसीय हड़ताल पूरे देश में की गई, जिसमें लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और अभियंता शामिल हुए।

उन्होंने बताया कि यह आंदोलन मुख्य रूप से पावर सेक्टर के निजीकरण के विरोध में है। कर्मचारी इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही, पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग भी इस हड़ताल का एक प्रमुख हिस्सा है।

मध्य प्रदेश से जुड़ी विश्वसनीय और ताज़ा खबरें MP Breaking News in Hindi यहां आपको मिलती है MP News के साथ साथ लगातार अपडेट, राजनीति, अपराध, मौसम और स्थानीय घटनाओं की सटीक जानकारी। भरोसेमंद खबरों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें और अपडेटेड रहें !
Banshika Sharma
लेखक के बारे में
मेरा नाम बंशिका शर्मा है। मैं एमपी ब्रेकिंग न्यूज़ में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हूँ। मुझे समाज, राजनीति और आम लोगों से जुड़ी कहानियाँ लिखना पसंद है। कोशिश रहती है कि मेरी लिखी खबरें सरल भाषा में हों, ताकि हर पाठक उन्हें आसानी से समझ सके। View all posts by Banshika Sharma
Follow Us :GoogleNews