ढाका: बांग्लादेश में हुए आम चुनाव के वोटों की गिनती जारी है और शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा दी हैं। अब तक के आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) 60 सीटों पर निर्णायक बढ़त बनाए हुए है। वहीं, बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी पार्टी भी 18 सीटों पर आगे चल रही है। यह चुनाव इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था।
मतगणना के बीच बीएनपी के लिए एक और बड़ी खबर आई है। पार्टी के चेयरमैन तारिक रहमान ने अपने क्षेत्र से भारी मतों से जीत दर्ज कर ली है। इस जीत के बाद पार्टी ने विश्वास जताया है कि अंतिम नतीजे उनके पक्ष में ही होंगे।
शेख हसीना ने चुनाव को बताया अवैध
चुनाव परिणामों के रुझानों के बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि बांग्लादेश की जनता ने इस चुनाव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसका सबूत मतदान केंद्रों पर कम संख्या में लोगों की मौजूदगी है।
“बांग्लादेश की जनता ने चुनाव को अस्वीकार कर दिया है, तभी बड़ी संख्या में लोग वोट डालने के लिए नहीं निकले। इस चुनाव में लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान की भावना और वोटर्स की वास्तविक भागीदारी को इग्नोर किया गया। इस चुनाव को रद्द किया जाना चाहिए।”- शेख हसीना, पूर्व प्रधानमंत्री
हसीना के इन आरोपों के ठीक उलट सरकार ने चुनाव प्रक्रिया को सफल बताया है। सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने एक बयान जारी कर चुनाव आयोग, सुरक्षा बलों, मीडियाकर्मियों और मतदान प्रक्रिया में शामिल सभी कर्मचारियों का धन्यवाद किया।
सरकार ने की शांति बनाए रखने की अपील
मोहम्मद यूनुस ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे नतीजों के बाद भी देश में लोकतांत्रिक मर्यादा और सहिष्णुता बनाए रखें। उन्होंने कहा, “आपके बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित में हमें एकजुट रहना होगा।” सरकार का जोर चुनाव के बाद शांति और व्यवस्था कायम रखने पर है।
कैसा है बांग्लादेश का चुनावी गणित?
बांग्लादेश की संसद में कुल 350 सदस्य होते हैं। इनमें से 300 सीटों पर सीधे जनता के वोट से चुनाव होता है, जबकि 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। यहां चुनाव ‘फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट’ प्रणाली के तहत होता है, जिसमें सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार विजयी होता है। संसद का कार्यकाल 5 साल का होता है। इस बार चुनाव आयोग ने 42,659 मतदान केंद्र बनाए थे, जहां करीब 5 लाख चुनाव कर्मियों को तैनात किया गया था। मतगणना पर नजर रखने के लिए 45 हजार पर्यवेक्षक भी नियुक्त किए गए थे।





