कांग्रेस MLA यह क्या बोल गए , ‘कमलनाथ 85 साल का डोकरा, पार्टी छोड़ने वालों को पड़ रहे जूते’

कांग्रेस MLA यह क्या बोल गए , ‘कमलनाथ 85 साल का डोकरा, पार्टी छोड़ने वालों को पड़ रहे जूते’

झाबुआ, विजय शर्मा| मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव (Byelection) की तारीखों के एलान से पहले तीखी बयानबाजी का दौर तेज हो गया है| नेताओं की जुबान फिर से फिसलने लगी है। ऐसे में भाषा की मर्यादा तार तार होती नजर आ रही है| मामला झाबुआ जिले (Jhabua District) का है, जहां कांग्रेस विधायक वीरसिंह भूरिया (Veersingh Bhuria) के बोल बिगड़ गए| उन्होंने न सिर्फ विरोधियों के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी की, बल्कि अपने ही नेता के लिए अपमानजनक शब्द बोल गए|

दरअसल, थांदला विधायक वीर सिंह भूरिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है| एक बैठक में सम्बोधित करते हुए कांग्रेस विधायक आपत्तिजनक टिप्पणी कर बैठे| उन्होंने कहा कि पार्टी के जो विधायक और मंत्री बाइक उनको अब जूते पड़ रहे हैं| वहीं उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को 80-85 साल का डोकरा बता दिया|

विधायक ने कहा कि कमलनाथ कि ग्वालियर की रैली देखी, 80-85 साल का डोकरा है कमलनाथ, लेकिन फिर भी इधर उधर जा रहे हैं, उन्होंने 14 किलोमीटर की रैली की है| विधायक ने आगे कहा कि बीजेपी नेता इधर उधर दौड़ रहे दलाली करने के लिए| विधायक ने कहा कि आगामी दिनों में आने वाले समय में क्षेत्र में पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता एकजुट रहें| ग्रामीणों की समस्याओं में उनकी मदद करें, स्थानीय समस्याओं को लेकर भी कार्यकर्ता निराकरण के लिए ग्रामीणों के साथ मिलकर काम करें|

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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