नहीं रहे देवप्रभाकर शास्त्री ‘दद्दा जी’, सीएम ने दी श्रद्धांजलि

नहीं रहे देवप्रभाकर शास्त्री ‘दद्दा जी’, सीएम ने दी श्रद्धांजलि

कटनी| वंदना तिवारी| गृहस्थ संत देवप्रभाकर शास्त्री ‘दद्दा जी’ का रविवार को निधन हो गया| दद्दाजी की हालत गंभीर थी और वे वेंटीलेटर पर थे। शनिवार रात को ही उन्हें दिल्ली से विशेष विमान से जबलपुर लाया गया था| उसके बाद यहां से उन्हें कटनी ले जाया गया। दद्दाजी के निधन से प्रदेश में शोक की लहर है|

मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर दद्दाजी को श्रद्धांजलि दी है| उन्होंने लिखा ‘मध्यप्रदेश के महान संत, आध्यात्मिक गुरु,लाखों लोगों के जीवन को दिशा देने वाले, ऐसे महात्मा जिनका सम्पूर्ण जीवन पीड़ित मानवता की सेवा में समर्पित था, जिन्होंने अपनी आध्यात्मिक शक्ति व आशीर्वाद से लोगों की ज़िंदगी बदल दी, ऐसे पूजनीय दद्दाजी के चरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ’। श्रद्धेय दद्दाजी ने पार्थिव शिवलिंग के निर्माण का एक ऐसा अभियान चलाया जिससे अध्यात्म, धर्म और सद्विचार की एक नई लहर पैदा हुई और भारतीय संस्कृति को एक ही धागे में पिरोने का पवित्र कार्य हुआ। दद्दाजी का देवलोकगमन आज हुआ है, उनका आशीर्वाद मुझे सदैव मिला और वे आज भी मुझे आशीर्वाद और प्रेरणा देते दिखाई दे रहे हैं। वे भले ही आज भौतिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन वे सदैव हमें प्रेरणा देते रहेंगे, आशीर्वाद देते रहेंगे और हमें सन्मार्ग दिखाते रहेंगे। उनके चरणों में प्रणाम।

तबियत जानने पहुंचे थे कई दिग्गज
रविवार को संत देवप्रभाकर शास्त्री के दर्शन करने कई दिग्गज नेता पहुंचे| मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह, भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय, गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह, रमेश मेंदोलो, सहित कई दिग्गज नेता और अभिनेता निवास पर पहुंच के गुरु के स्वास्थ्य की जानकारी ली | दद्दा जी द्वारा पूरे भारत के कई स्थानो पर शिवलिंग निर्माण एवं भागवत यज्ञ करवा चुके है।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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