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देश की सबसे लंबी जल-सुरंग स्लीमनाबाद टनल: विंध्य के खेतों तक पहुंचेगा नर्मदा जल, 6 जिलों के 1450 गांवों को लाभ, CM आज निरीक्षण करेंगे

17 सालों के इंतजार के बाद देश की सबसे लंबी जल-सुरंग स्लीमनाबाद टनल का काम अंतिम चरण में पहुंच गया है। परियोजना के शुरू होने के बाद 6 जिलों के 1450 गांवों और 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई लाभ मिलेगा
CM Mohan Yadav

CM Mohan Yadav

मध्यप्रदेश के सिंचाई इतिहास की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल स्लीमनाबाद जल-सुरंग अब पूर्णता के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार (17 जुलाई 2026) को कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही देश की सबसे लंबी और अत्याधुनिक भूमिगत जल सुरंग के अंतिम चरण के कार्यों का निरीक्षण करेंगे।

बता दें कि 11.952 किलोमीटर लंबी महा-सुरंग का काम लगभग पूरा हो चुका है, जिसमें अब मात्र अंतिम एक मीटर का ब्रेक-थ्रू सफर शेष रह गया है। यह सुरंग विंध्य पर्वतमाला के भीतर से नर्मदा के जल को गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी के कछार तक पहुंचाने वाली देश की अनूठी इंजीनियरिंग उपलब्धि है। इस टर्न-की  आधार पर स्वीकृत महा-परियोजना का जिम्मा हैदराबाद की प्रतिष्ठित निर्माण एजेंसी मेसर्स पटेल-एस.ई.डब्ल्यू. (संयुक्त उपक्रम) को सौंपा गया था। वर्ष 2008 में परियोजना के अनुबंध के समय लागत 799 करोड़ रुपये थी लेकिन अब तक कुल 1610.47 करोड़ रुपये का व्यय किया जा चुका है।

स्लीमनाबाद टनल के प्रमुख बिन्दु

  • यह भारत की सबसे लंबी भूमिगत जल परिवहन सुरंग है।
  • नर्मदा नदी का पानी बिना किसी पंप या लिफ्ट के, केवल गुरुत्वाकर्षण (Gravity Flow) के सहारे विंध्य पर्वतमाला को पार कर सोन नदी के कछार (Basin) तक पहुंचेगा।
  • नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) की इस परियोजना को वर्ष 2008 में स्वीकृति मिली और 2011 में निर्माण शुरू हुआ।
  • जल सुरंग की 11.952 किलोमीटर लंबाई है।
  • अब तक कुल 1610.47 करोड़ रुपये का खर्च। मूल कार्यमद पर 772.33 करोड़ रुपये, मूल्य समायोजन पर 573.71 करोड़ रुपये, उच्च क्षमता के आधुनिक डीवॉटरिंग सिस्टम पर 123.99 करोड़ रुपये, वर्टिकल शाफ्ट के निर्माण पर 19.36 करोड़ रुपये और चट्टानों के स्थिरीकरण के लिए की गई केमिकल ग्राउटिंग पर 121.08 करोड़ रुपये की राशि व्यय की गई है।
  • मार्च 2026 तक 44,160 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा शुरू की जा चुकी है।
    दिसंबर 2026 तक 87,433 हेक्टेयर और दिसंबर 2027 तक 1.54 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को सिंचाई से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

6 जिलों के 1450 गांवों और 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई लाभ

  • जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी।
  • विंध्य और महाकौशल क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा। टनल के क्रियाशील होते ही इसके सीधे कमांड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कटनी जिले की 21 हजार 823 हैक्टेयर, मैहर जिले की 54 हजार 227 हैक्टेयर, सतना जिले की 1 लाख 4 हजार 970 हैक्टेयर, रीवा जिले की 3 हजार 84 हैक्टेयर और पन्ना जिले की 448 हैक्टेयर सूखी भूमि को हरा-भरा जीवन मिल जाएगा।
Pooja Khodani
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