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नरसिंहपुर में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही: मृत शिक्षक को भेजा ई-अटेंडेंस नोटिस, मचा हड़कंप

मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। करीब सात महीने पहले निधन हो चुके एक शिक्षक को ई-अटेंडेंस नहीं लगाने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया।
नरसिंहपुर में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही: मृत शिक्षक को भेजा ई-अटेंडेंस नोटिस, मचा हड़कंप

नरसिंहपुर जिले के करेली जनपद अंतर्गत पिपरिया स्थित रितुआ टोला प्राथमिक शाला से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग ने करीब सात महीने पहले दिवंगत हो चुके एक शिक्षक के नाम ई-अटेंडेंस नहीं लगाने को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। यह नोटिस 11 जुलाई 2026 को जारी हुआ, जबकि संबंधित शिक्षक का निधन 28 दिसंबर 2025 को हो चुका था।

परिजनों का कहना है कि शिक्षक के निधन के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र सहित सभी जरूरी दस्तावेज समय पर विभाग में जमा करा दिए गए थे। इसके बावजूद उनके नाम से नोटिस जारी होना न सिर्फ विभागीय लापरवाही को दिखाता है, बल्कि रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है।

रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल

इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब शिक्षक की मृत्यु की जानकारी विभाग के पास पहले से मौजूद थी, तब उनका नाम ई-अटेंडेंस पोर्टल पर सक्रिय कैसे बना रहा। यदि समय पर रिकॉर्ड अपडेट कर दिया जाता, तो इस तरह की स्थिति सामने नहीं आती। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल सिस्टम तभी प्रभावी माना जाता है, जब उसमें दर्ज जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाए और विभागीय स्तर पर उसकी निगरानी भी हो।

नरसिंहपुर में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही: मृत शिक्षक को भेजा ई-अटेंडेंस नोटिस, मचा हड़कंप

सरकारी विभागों में अब अधिकांश काम ऑनलाइन पोर्टल के जरिए किए जा रहे हैं। ऐसे में यदि कर्मचारी के सेवा रिकॉर्ड, स्थानांतरण, सेवानिवृत्ति या मृत्यु जैसी महत्वपूर्ण जानकारी समय पर दर्ज नहीं होती, तो इससे न केवल प्रशासनिक भ्रम पैदा होता है, बल्कि संबंधित परिवारों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह मामला इसी तरह की लापरवाही का उदाहरण माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि सभी जिलों में डिजिटल रिकॉर्ड का समय-समय पर ऑडिट होना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच के दिए निर्देश

मामले के सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने इसे गंभीरता से लिया है। उन्होंने प्रारंभिक प्रतिक्रिया में कहा कि यह संभवतः तकनीकी त्रुटि या रिकॉर्ड अपडेट न होने की वजह से हुआ है। साथ ही उन्होंने संबंधित पोर्टल में रिकॉर्ड दुरुस्त कराने और पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि रिकॉर्ड अपडेट करने में किस स्तर पर चूक हुई और जिम्मेदारी किसकी बनती है।

शिक्षा विभाग के लिए यह मामला केवल एक तकनीकी गलती तक सीमित नहीं माना जा रहा, क्योंकि इससे विभाग की कार्यप्रणाली और डेटा प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। यदि किसी कर्मचारी के निधन के कई महीने बाद भी उसका रिकॉर्ड सक्रिय रहता है, तो इससे अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी असर पड़ सकता है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह साफ होगा कि यह केवल सिस्टम की तकनीकी समस्या थी या विभागीय स्तर पर लापरवाही हुई। वहीं परिजन उम्मीद कर रहे हैं कि जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी और भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं दोहराई जाएगी।

Bhawna Choubey
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पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey
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