पुलिस ने निभाया डॉक्टर का फर्ज़, मीलों पैदल चलकर आए मज़दूरों के पैरों में लगाया मरहम

पुलिस ने निभाया डॉक्टर का फर्ज़, मीलों पैदल चलकर आए मज़दूरों के पैरों में लगाया मरहम

कटनी/वंदना तिवारी

कोरोना संकटकाल में ड्यूटी में जुटे पुलिसकर्मियों का मानवीय पक्ष भी लगातार सामने आ रहा है। कटनी में भी कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला जब लंबी दूरी तय कर पैदल आ गरीब मज़दूरों की पुलिस ने आगे बढ़कर मदद की। उन्होने इन मज़दूरों के चोटिल पैरों को साफ कराया और खुद मरहम लगाया, साथ ही उन्हें शासन प्रशासन द्वारा दी जा रही सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी।

सोमनाथ, सत्यम, विनय पटेल, रविंद्र कुमार लोधी ये सभी पान उमरिया के सूरत से भोपाल तक जंगल के रास्ते से पैदल चलकर आए फिर सोनकच्छ में खाना-पीना मिला। 3 दिन तक चना मूंगफली बिस्कुट खाकर इन्होने रास्ता तय किया और भोपाल के पास इनका मेडिकल चेकअप किया गया। फिर भोपाल पुलिस और प्रशासन की मदद से रीठी तक ट्रकों में भेजा गया और फिर जंगल के रास्ते से कटनी पहुंचने पर वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिस टीम में शामिल उप निरीक्षक पंकज शुक्ला, प्रधान आरक्षक विजेंद तिवारी, आरक्षक नकुल पटेल और पायलेट ठाकुर द्वारा इन मजदूरों के घावों पर न सिर्फ मरहम लगाया गया, बल्कि इन्हे समझाइश भी दी गई। पुलिस ने इन्हें प्राथमिक ट्रीटमेंट दिया, डेटॉल से सफाई के बाद इनके पैरों पर खुद दवा लगाई। कोरोना के कारण कामकाज बंद जाने से ये लोग पैदल ही अपने गांव के लिये निकल पड़े थे और गुजरात से मध्य प्रदेश तक का सफर पैदल रास्ते से 3 दिन 3 रात में तय किया, लेकिन अच्छी बात रही कि जब इनका सामना यहां पुलिस से हुआ तो बजाय उनकी सख्ती के इन्हें पुलिस का एक मानवीय पक्ष दिखा।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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