बारिश ने बदला मौसम का मिजाज, उमस से राहत, सड़कें लबालब

बारिश ने बदला मौसम का मिजाज,  उमस से राहत, सड़कें लबालब

ओंकारेश्वर| सुशील विधानी| पिछले कई दिनों से आसमान में उमड़-घुमड़ रहे बादल आखिरकार शुक्रवार को झमाझम बरसे। दोपहर करीब 2:30 बजे से शुरू हुई बारिश शाम 4:30 बजे तक जारी रही। इस दौरान कई बार बौछारें तो कभी रिमझिम फुहारें पड़ती रहीं। जोरदार हुई बरसात से ओंकारेश्वर के आसपास क्षैत्र में खेत-खलिहान,सहित नगर में गली, सड़कें लबालब हो गईं।

पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी के बीच आसमान में बादल तो छा रहे थे, लेकिन रिमझिम फुहारों से ज्यादा बारिश नहीं हुई। इससे लोग परेशान थे। शुक्रवार सुबह से उमस भरी गर्मी दोपहर बाद तक लोगों को बेहाल करती रही। दोपहर करीब 2 बजे के बाद मौसम का अचानक रुख बदलने से आसमान में काले बादलों की घटा छा गई और झमाझम बारिश शुरू हो गई, जो तेज बौछारों के साथ डेढ़ घण्टे तक होती रही, जिससे मुख्य बाजार में पानी ही पानी नजर आने लगा। क्षैत्र में खेत-खलिहान तालाब बन गए। सड़कों पर व गलियों में बारिश का पानी भर जाने के कारण लोगों को आवागमन में भी परेशानी झेलनी पड़ी।
वार्ड क्रमांक 7 के पार्षद दिनेश वर्मा ने सोशल मिडिया पर नगर के मुख्य मार्ग पर जल भराव को लेकर नगर परिषद सिएमओ एवं इंजिनीयर पर कार्य के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए लिखा की रोड का टेंडर हो चुका है फिर भी निर्माणकार्य रुका हुआ हैं। इधर बारिश से मौसम खुशगवार होने पर लोग सड़कों पर भीगते नजर आए।

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निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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