जीआरपी थाना प्रभारी हेमंत श्रीवास्तव को प्रतिष्ठित के एफ रूस्तमजी पुरस्कार

जीआरपी थाना प्रभारी हेमंत श्रीवास्तव को प्रतिष्ठित के एफ रूस्तमजी पुरस्कार

खंडवा। जीआरपी थाना प्रभारी श्री हेमन्त श्रीवास्तव को मध्यप्रदेश पुलिस का सर्वाधिक प्रतिष्ठित के एफ रूस्तमजी पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा। उन्हे वर्ष 2017-18 के लिए परम विशिष्ट श्रेणी में यह पुरस्कार दिया जा रहा है जिसमें एक समारोहपूर्वक में रिवॉल्वर तथा प्रमाणपत्र से सम्मानित किया जायेगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि श्री श्रीवास्तव यह सम्मान पाने वाले पहले पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें दूसरी बार यह महत्वपूर्ण पुरस्कार दिया जा रहा है।

मध्यप्रदेश शासन के गृह विभाग ने 28 जनवरी को जारी आदेश में के एफ रूस्तमजी पुरस्कार वर्ष 2017 तथा 2018 की अनुशंसा की। इसमें वर्ष 2016-17 लिए 3 नाम परम विशिष्ट और 3 अतिविशिष्ट की श्रेणी में घोषित किये गए। इसी तरह वर्ष 2017-18 के लिए 3 परम विशिष्ट और 2 अतिविशिष्ट की श्रेणी के लिए नाम घोषित किये गए। वर्तमान में खण्डवा जीआरपी थानाप्रभारी पुलिस निरीक्षक हेमन्त श्रीवास्तव को 2017-18 के लिए परम विशिष्ट पुरस्कार के लिए चयन  किया गया है।

यह परम विशिष्ट पुरस्कार उन्हें हबीबगंज रेलवे स्टेशन के समीप एक 19 वर्षीय स्टूडेंट्स के साथ हुई गैंग रेप की बहुचर्चित वारदात के चारों आरोपियों को न केवल तत्काल गिरफ़्तार करने बल्कि महज़ पंद्रह दिन भीतर कोर्ट में चालान पेश कर उन्हें ताउम्र कारावास की सज़ा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उल्लेखनीय है कि यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही इस छात्रा के साथ हबीबगंज रेलवे स्टेशन के नज़दीक 31 अक्टूबर 2017 की रात को चार बदमाशों ने गेंग रेप किया था और उसे मरणासन्न अवस्था में छोड़ दिया था। हैरत की बात यह थी कि वह आरपीएफ के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर की बेटी थी इसके बावजूद उसकी एफआईआर लिखने में खासी दिक्क़तें आई। प्रदेश की राजधानी में हुई इस घटना को लेकर देशभर में इसकी तीव्र प्रतिक्रिया आई तब शासन ने श्री हेमंत श्रीवास्तव के नेतृत्व में स्पेशल इन्वेस्टिगेटिव टीम (एसआईटी) गठित की गई जिसने सबसे पहले तत्परतापूर्वक कार्यवाही करते हुए चारो आरोपियों को गिरफ़्तार किया और पूरे मामले मे बहुत बारीकी से तमाम साक्ष्य जुटाए। आरोपियों का डीएनए टेस्ट कराने के साथ ही बहुत सांइन्टिफिक तरीके से छानबीन की गई जिसका परिणाम यह हुआ कि महज़ पंद्रह दिन में चालान पेश किया गया और कोर्ट ने सभी आरोपियों को जीवन की अंतिम साँस तक कारावास की कठोर सज़ा सुनाई। श्री श्रीवास्तव की टीम ने यह जो प्रामाणिक और समयबद्ध इन्वेस्टिगेशन किया यह पुलिस के प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए केस स्टडी भी बन गया।

इसके पूर्व श्री श्रीवास्तव को वर्ष 2016 में भी  के.एफ. रुस्तमजी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था तब उन्हें विशिष्ट श्रेणी में चुना गया था जिसमे 50 हज़ार रुपयों की नकद राशि एवं सम्मान पत्र था। यह सम्मान उन्हें भोपाल जीआरपी थानाप्रभारी रहते हुए ट्रेन में एक करोड़ रुपयों की डायमंड ज्वेलरी की लूट को पकड़ने के लिए मिला था। नवम्बर 2015 में पुष्पक एक्सप्रेस में सेकेण्ड ऐसी कोच में मुंबई के एक बड़े कारोबारी के परिवार के बैग से एक करोड़ रुपयों की डायमंड ज्वेलरी चोरी होने की बड़ी वारदात हुई थी। इसमें श्री श्रीवास्तव ने अपनी टीम के साथ अथक मेहनत कर बिहार के बेगूसराय से 14 लोगो की एक गेंग को पकड़ने में सफलता हासिल की और उनसे डायमंड ज्वेलरी भी बरामद की। तत्कालीन गृह मंत्री बाबूलाल गौर ने इस नामुमकिन से लगने वाले मामले में मिली बड़ी सफलता के लिए श्री श्रीवास्तव की टीम को एक लाख रुपयों की नकद राशि भी पुरस्कार स्वरूप दी।

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