भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए, महामहिम राष्ट्रपति से की संविधान में राष्ट्रवाद को जोड़ने की मांग

भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए, महामहिम राष्ट्रपति से की संविधान में राष्ट्रवाद को जोड़ने की मांग

खंडवा। सुशील विधानि।

गुरूवार को राष्ट्रभक्त वीर युवा मंच ने भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने एवं संविधान में राष्ट्रवाद को जोड़ने की मांग को लेकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन अनुविभागीय दंडाधिकारी खंडवा को सौंपा। मंच संरक्षक अशोक पालीवाल समर्थकों के साथ एसडीएम कार्यालय पहुंचे और इस संबंधील ज्ञापन दिया। राष्ट्रपति के नाम सौंपे ज्ञापन में कहा गया कि धर्म के आधार पर जिस तरह 1947 में पाकिस्तान इस्लामिक राष्ट्र बना उसी तरह भारत को भी संवैधानिक रूप से हिंदू राष्ट्र घोषित करना चाहिए। जिस तरह से देश में अराजक शक्तियों द्वारा समय-समय पर उन्माद फैलाया जा रहा है। जिस तरह नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) जो की नागरिकता देने वाला कानून है, उसे लेकर अराजक शक्तियों द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है जो की नागरिकता देने का कानून है ना की नागरिकता लेने का। इसी देखते हुए भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए एवं संविधान में राष्ट्रवाद को जोड़ा जाए। इस मांग को लेकर यह ज्ञापन दिया गया। वहीं एसडीएम से आगामी मंगलवार से इस विषय को लेकर नगर निगम खंडवा पर सांकेतिक धरना दिया जाएगा जो शांतिपूर्ण तरीके से होगा। इस दौरान मंच के माधव झा, ब्रह्मानंद तिवारी, शिवेश ठाकुर, पंकज यादव, नीरज कार्तिकेय, रोहित पटेल आदि कार्यकर्ता मौजूद थे।

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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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