कुपोषण मुक्त इंदौर संभाग में खंडवा का अच्छा प्रदर्शन

कुपोषण मुक्त इंदौर संभाग में खंडवा का अच्छा प्रदर्शन

खंडवा। सुशील विधानि।

खंडवा सुशील विधानी। आदिवासी विकासखंड खालवा क्षेत्र में दशकों से चल रहे कुपोषण पर शुरूआती विजय की अच्छी खबर आई है। अति संवेदनशील खालवा ब्लाक अति कम वजन के बच्चों में भी श्रेणी परिवर्तन अच्छा पाया गया। पिछले साल जुलाई में कुपोषित बच्चों की मृत्यु दर लगभग नहीं के बराबर रही। इंदौर संभाग को कुपोषण मुक्त बनाने में खालवा पर विशेष ध्यान देने से 85 प्रतिशत सफलता मिली। टारगेट सौ प्रतिशत करने के लिए हर बच्चे की प्रोफाइल बनाकर निगरानी ही नहीं रखी जा रही है,बल्कि श्रेणी परिवर्तन के लिए योजनाओं के मार्फत काम भी किया जा रहा है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी अंशुबाला मसीह ने बताया कि 15 जुलाई 19 तक के फ्रीज किए आंकड़ों की स्थिति में अति कम वजन के बच्चों की संख्या 2676 थी। इनमें से 18 बच्चों का वजन जैसा का तैसा ही रहा। 26 बच्चों के वजन में और कमी आ गई थी। 2378 बच्चों का वजन योजनाओं और देखभाल से बढ़ गया। इसमें से 400 ग्राम से अधिक वजन 2130 बच्चों का बढ़ा। यह प्रतिशत 79.6 था। 928 बच्चों में कुपोषण की श्रेणी में बदलाव आया,यह कार्यकर्ताओं व विभाग की मेहनत का नतीजा है। अतिकम वजन से ऊपर उठने वाले बच्चों की संख्या 837 थी। 254 बच्चे तो पांच साल से ज्यादा उम्र के हो गए।
मतलब साफ है कि खंडवा जिले में कुपोषण से लड़ने वाली जंग में पहले तो कुपोषण ही जीतता था। अब सरकार की योजनाएं और इन्हें क्रियान्वित करने वाले अफसरों व जमीनी कार्यकर्ताओं के भी चेहरों पर चमक साफ दिख रही है।

नए चिह्नांकित बच्चों के आंकड़ों में महिला एवं बाल विकास विभाग की मेहनत साफ दिख रही है। यहां 15 जुलाई 19 की स्थिति में अति कम वजन के बच्चे 516 मिले। इनमें 13 का वजन विभाग नहीं बढ़ा पाया। इसके अलावा 7 बच्चों के वजन में कमी भी आ गई। विभाग इसलिए भी और तेजी से काम करने के लिए तैयारी कर रहा है कि टारगेट सौ प्रतिशत कैसे हो सकता है। यह कठिन जरूर है, लेकिन जिला कार्यक्रम अधिकारी अंशुबाला मसीह इसलिए भी संतुष्ट हैं कि मृत्युदर पर एकदम अंकुश लग गया है। इसका श्रेय वे जमीनी और मैदानी कर्मियों को ज्यादा देती हैं। 462 बच्चों के वजन में वृद्धि हुई है। 400 ग्राम से अधिक वजन जिन बच्चों में बढ़ा उनकी संख्या 324 है। 146 बच्चे अति कम वजन से एक स्टेप ऊपर उठे हैं।

Gaurav Sharma
लेखक के बारे में
Gaurav Sharma

निदेशक और संपादक

पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
Follow Us :GoogleNews