खंडवा जिले में अवैध कच्ची शराब की बिक्री को लेकर महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को पंधाना, कालंका, टाकलखेड़ा और आसपास के गांवों की महिलाएं अपनी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं।
महिलाओं के हाथ में शिकायत ही नहीं थी, बल्कि उन्होंने सिर पर कच्ची शराब के डिब्बे रखे हुए थे। इस अनोखे तरीके से महिलाओं ने प्रशासन का ध्यान गांवों में खुलेआम बिक रही शराब की ओर खींचा।
कच्ची शराब के डिब्बे लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं महिलाएं
पंधाना, कालंका, टाकलखेड़ा सहित आसपास के गांवों की महिलाएं मंगलवार को बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचीं। विरोध का उनका तरीका बाकी प्रदर्शनों से अलग था। महिलाएं अपने सिर पर कच्ची शराब के डिब्बे रखकर आई थीं।
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद महिलाओं ने प्रशासन के सामने अपनी शिकायत रखी। उनका कहना था कि गांवों में अवैध कच्ची शराब की बिक्री खुलेआम हो रही है और इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही।
रक्षाबंधन पर कलेक्टर को दिया ‘शराब का तोहफा’
महिलाओं ने अपने विरोध को रक्षाबंधन से भी जोड़ दिया। उन्होंने कलेक्टर को अपना ‘लाडला भाई’ बताते हुए कहा कि वे उन्हें रक्षाबंधन पर तोहफा देने आई हैं। महिलाओं ने कच्ची शराब के डिब्बे प्रशासन को सौंपते हुए कहा कि यह तोहफा इसलिए दिया जा रहा है, ताकि अधिकारियों को गांवों में बिक रही शराब की स्थिति दिखाई जा सके।
महिलाओं ने बनाई समिति
विरोध में शामिल महिला ममता मोरे ने बताया कि महिलाओं ने मिलकर एक समिति बनाई है। समिति से जुड़ी महिलाएं गांव-गांव जाकर लोगों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि उनका अभियान सिर्फ लोगों को समझाने तक सीमित नहीं है। वे गांवों में बिक रही अवैध कच्ची शराब के खिलाफ भी आवाज उठा रही हैं।
ममता मोरे विरोध में शामिल महिला
महिलाओं के मुताबिक, जहां उन्हें अवैध शराब की बिक्री की जानकारी मिलती है, वहां वे उसे पकड़कर पुलिस को सौंपने और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि अगर गांव में शराब की बिक्री बंद होती है तो कई परिवारों की परेशानी कम हो सकती है।
बोलीं- शराब से परिवार हो रहे बर्बाद
महिलाओं ने प्रशासन के सामने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि गांवों में खुलेआम कच्ची शराब बिकने का असर पूरे परिवार पर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि शराब की वजह से कई घरों में आर्थिक परेशानी बढ़ रही है। पुरुषों की कमाई का पैसा शराब में खर्च होने से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों पर भी पड़ता है।
अनार बाई ग्रामीण महिला
महिलाओं ने कहा कि वे लंबे समय तक इस समस्या को सहन नहीं करेंगी। उनका अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक गांवों में अवैध शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लगती।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
महिलाओं ने कलेक्टर से मांग की कि पंधाना, कालंका, टाकलखेड़ा और आसपास के गांवों में अवैध कच्ची शराब बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि सिर्फ एक-दो जगह कार्रवाई करने से समस्या खत्म नहीं होगी। अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चलाने की जरूरत है।
महिलाओं ने पुलिस और आबकारी विभाग से भी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन अगर नियमित जांच और कार्रवाई करे तो गांवों में अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाई जा सकती है।
अपर कलेक्टर ने दिया कार्रवाई का भरोसा
महिलाओं की शिकायत पर अपर कलेक्टर केआर बड़ोले ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि महिलाओं की शिकायत के आधार पर पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम से बड़ी कार्रवाई कराई जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद महिलाओं को उम्मीद है कि गांवों में अवैध कच्ची शराब के खिलाफ जल्द कार्रवाई होगी।






