आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए दिया ज्ञापन

आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल  करने के लिए दिया ज्ञापन

सुशील विधानी/खंडवा।

भीम समुदाय ने जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया गया जिसमें बताया गया कि अनुसचित जाति / जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग को संविधान से प्राप्त प्रतिनिधित्व का अधिकार आरक्षण प्राप्त होते रहा है। जिस पर सर्वोच्च न्यायलय द्वारा कुछ दिनों पहले एक निर्णय में कहा गया हैं। पदोउन्नति में आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं हैं। सिर्फ संवैधानिक अधिकार हैं और उसे लागू करने के बारे में यह कहाँ गया है कि में अगर राज्य यह अधिकार देना चाहे तो दे अन्याथा ना दे आरक्षण किसी भी प्रकार का मौलिक अधिकार नहीं हैं।

जिस निर्णय से सम्पूर्ण भारत के शोषित एवं पिछडे वर्ग के लोगों में भय का माहौल बना हुआ है । कि राज्य कभी भी हमारे अधिकारों को हम से छिन सकता है। और हम , हमार हक अधिकार के तौर पर मांग नहीं कर सकते है । देश में आरक्षण विरोधी बयान आते रहते है । जिससे शोषित एवं पिछडे वर्ग के लोगों को बार बार अपमानित होना पड़ता हैं अतः देश में एक पक्ष आरक्षण का पक्षधर है तो दूसरी ओर एक पक्ष इसके विपक्ष में है ।

जिससे देश में आपसी भाई चारे को खतरा उत्पन्न होने की संभावना हो सकती है जिससे देश की एकता और अखंडता को ठेस पहुँच सकती हैं इस लिये मान्यवर राष्ट्रपति महोदय जी , आपसे अनुरोध हैं कि अनसचित जाति / जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग जाति के प्रतिनिधित्व का अधिकार आरक्षण ) को मौलिक अधिकार मानकर संविधान की 9वीं अनुसूचि में सामिल कर इस समस्या का स्थायी समाधान करने की कृपा करें।

Gaurav Sharma
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पत्रकारिता पेशा नहीं ज़िम्मेदारी है और जब बात ज़िम्मेदारी की होती है तब ईमानदारी और जवाबदारी से दूरी बनाना असंभव हो जाता है। एक पत्रकार की जवाबदारी समाज के लिए उतनी ही आवश्यक होती है जितनी परिवार के लिए क्यूंकि समाज का हर वर्ग हर शख्स पत्रकार पर आंख बंद कर उस तरह ही भरोसा करता है जितना एक परिवार का सदस्य करता है। पत्रकारिता मनुष्य को समाज के हर परिवेश हर घटनाक्रम से अवगत कराती है, यह इतनी व्यापक है कि जीवन का कोई भी पक्ष इससे अछूता नहीं है। यह समाज की विकृतियों का पर्दाफाश कर उन्हे नष्ट करने में हर वर्ग की मदद करती है। इसलिए पं. कमलापति त्रिपाठी ने लिखा है कि," ज्ञान और विज्ञान, दर्शन और साहित्य, कला और कारीगरी, राजनीति और अर्थनीति, समाजशास्त्र और इतिहास, संघर्ष तथा क्रांति, उत्थान और पतन, निर्माण और विनाश, प्रगति और दुर्गति के छोटे-बड़े प्रवाहों को प्रतिबिंबित करने में पत्रकारिता के समान दूसरा कौन सफल हो सकता है। View all posts by Gaurav Sharma →
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