खंडवा में किसानों की मांगों को लेकर मंगलवार को संयुक्त कृषक संगठन के नेतृत्व में बाइक-वाहन रैली निकाली गई। दरअसल यह रैली अनाज मंडी से शुरू हुई और शहर के प्रमुख रास्तों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। देर शाम किसानों ने नारेबाजी करते हुए अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखीं। सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर को प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, कलेक्टर और कृषि संचालक के नाम अलग-अलग ज्ञापन दिए गए। रैली में किसान नेता नरेंद्र पटेल, जय पटेल सहित संगठन के पदाधिकारी और करीब 500 किसान शामिल हुए।
वहीं किसानों ने अपने ज्ञापन में खेती से जुड़े कई अलग-अलग मुद्दे उठाए। इनमें सभी बैंकों के ऋणी और डिफाल्टर किसानों की एकमुश्त कर्जमाफी, कृषि उपज के लिए MSP की कानूनी गारंटी और फसल बीमा व्यवस्था में बदलाव प्रमुख मांगों में शामिल रहे। किसानों का कहना है कि फसलों का उचित दाम नहीं मिलने और प्राकृतिक आपदाओं के कारण उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। इसी वजह से उन्होंने सरकार से अलग-अलग स्तर पर राहत और नीतिगत बदलाव की मांग की है।
किसानों की कर्जमाफी और MSP गारंटी की मांग
दरअसल प्रधानमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में किसानों ने सभी बैंकों के ऋणी और डिफाल्टर किसानों का एकमुश्त कर्ज माफ करने की मांग रखी। किसानों का कहना है कि फसलों के सही दाम नहीं मिलने और प्राकृतिक आपदाओं से आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा है। इसी के साथ उन्होंने कृषि उपज के लिए MSP की कानूनी गारंटी की मांग भी रखी है। किसानों के मुताबिक खेती से जुड़े खर्च और फसल के दाम के बीच संतुलन जरूरी है ताकि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके।
निर्यात को लेकर भी अपनी मांग रखी
वहीं किसानों ने कृषि उपज के निर्यात को लेकर भी अपनी मांग रखी। उन्होंने राज्यों को कृषि उपज के निर्यात में अधिक स्वतंत्र अधिकार देने की मांग की। उनका कहना है कि केंद्र की अनुमति या अनुशंसा में देरी होने पर कई बार बाजार में कृषि उपज के दाम प्रभावित होते हैं। इसके साथ ही कृषि को उद्योग का दर्जा देने और इसके लिए अलग प्राधिकरण बनाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई है। सोयाबीन और विदेशी खाद्य तेल के आयात शुल्क को लेकर भी किसानों के हित में नीति जारी रखने की मांग रखी गई।
खंडवा में फूड प्रोसेसिंग यूनिट की मांग
वहीं किसानों ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी मांग रखी। उन्होंने प्रभावित जमीन के लिए चार गुना मुआवजे के साथ प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी रोजगार का प्रावधान करने की मांग की। किसानों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में केवल मुआवजे की राशि से नई कृषि भूमि खरीदना मुश्किल है इसलिए भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी रोजगार की व्यवस्था जरूरी है।






