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उज्जैन में राशन दुकान संचालकों ने 90 से 200 रुपए प्रति क्विंटल कमीशन बढ़ाने की मांग की, 1 अक्टूबर से हड़ताल की चेतावनी

उज्जैन में राशन दुकान संचालकों ने कमीशन बढ़ाने को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उचित मूल्य दुकान संचालकों और महिला स्व-सहायता समूहों ने कलेक्टर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन देकर मौजूदा ₹90 प्रति क्विंटल कमीशन को बढ़ाकर ₹200 करने की मांग की है।
उज्जैन में राशन दुकान संचालकों ने 90 से 200 रुपए प्रति क्विंटल कमीशन बढ़ाने की मांग की, 1 अक्टूबर से हड़ताल की चेतावनी

उज्जैन में उचित मूल्य दुकान संचालकों और महिला स्व-सहायता समूहों ने कमीशन बढ़ाने समेत पांच सूत्री मांगों को लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा। दरअसल संचालकों ने मौजूदा ₹90 प्रति क्विंटल कमीशन को बढ़ाकर कम से कम ₹200 करने की मांग की है। मांगें पूरी नहीं होने पर 1 अक्टूबर से राशन दुकानों पर ताला लगाने और अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।

बता दें कि जिले में करीब 800 उचित मूल्य दुकानें संचालित हैं। संचालकों के अनुसार हर दुकान से औसतन 500 उपभोक्ता जुड़े हैं। ऐसे में करीब 4 लाख उपभोक्ताओं तक राशन वितरण की व्यवस्था इन दुकानों के जरिए होती है। संचालकों का कहना है कि वर्तमान कमीशन में दुकान का किराया, बिजली, इंटरनेट, कर्मचारियों का वेतन और दूसरे खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। इसी वजह से उन्होंने कमीशन बढ़ाने या फिर तय मासिक मानदेय देने की मांग रखी है।

राशन दुकान कमीशन बढ़ाकर ₹200 प्रति क्विंटल करने की मांग

दरअसल उपभोक्ता भंडार संघ के जिला अध्यक्ष मनोज शर्मा ने बताया कि मध्यप्रदेश में उचित मूल्य दुकान संचालकों को वर्तमान में ₹90 प्रति क्विंटल कमीशन मिलता है। संचालकों का कहना है कि यह कमीशन भी समय पर नहीं मिलता जिससे दुकान चलाने में आर्थिक परेशानी बढ़ती है। उनके मुताबिक मध्यप्रदेश को छोड़कर देश के दूसरे राज्यों में ₹200 से ₹300 प्रति क्विंटल तक कमीशन दिए जाने की बात कही गई है।

कमीशन को कम से कम ₹200 प्रति क्विंटल किया जाए

वहीं संचालकों ने ज्ञापन में साफ तौर पर मांग रखी है कि कमीशन को कम से कम ₹200 प्रति क्विंटल किया जाए। उनका कहना है कि मौजूदा महंगाई के बीच दुकान से जुड़े खर्च लगातार बने हुए हैं। किराया, बिजली, इंटरनेट और कर्मचारियों के वेतन के अलावा दूसरे जरूरी खर्च भी संचालकों को उठाने पड़ते हैं। ऐसे में ₹90 प्रति क्विंटल कमीशन में दुकान का संचालन करना मुश्किल हो रहा है। संचालकों ने कहा कि अगर कमीशन व्यवस्था में बदलाव संभव नहीं है तो उचित मूल्य दुकान संचालकों और महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित दुकानों के लिए निश्चित सैलरी की व्यवस्था की जाए।

महिला स्व-सहायता समूहों के लिए भी मानदेय की मांग

वहीं ज्ञापन में संचालकों ने गुजरात मॉडल का अध्ययन करते हुए मध्यप्रदेश में भी उचित मूल्य दुकान संचालकों और महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालि/त दुकानों के लिए ₹30 हजार प्रतिमाह निश्चित मानदेय देने की मांग रखी है। उनका कहना है कि इससे दुकान चलाने वालों को हर महीने मिलने वाली राशि तय रहेगी और कमीशन को लेकर बनी आर्थिक परेशानी कम हो सकती है। इसके साथ ही महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा संचालित उचित मूल्य दुकानों को भी दूसरे दुकान संचालकों के समान लाभ और सम्मानजनक आर्थिक व्यवस्था देने की मांग की गई है। संचालकों ने यह भी कहा है कि कमीशन या मानदेय का भुगतान हर महीने समय पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए। ज्ञापन में कुल पांच मांगें रखी गई हैं, जिनमें कमीशन बढ़ाना, निश्चित सैलरी या मानदेय की व्यवस्था, महिला समूहों को समान लाभ और हर महीने समय पर भुगतान शामिल है।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev →
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