कहते हैं कि सफलता (वाव इडली) की सीढ़ियों पर चढ़ना और दुनिया में अपना नाम बनाना आसान नहीं होता। ना ही यह सबके बस की बात है, लेकिन झारखंड में धनबाद जिले के छोटे से गांव से बड़ा सपना और हौसला साथ लिए इस राह पर आगे बढ़ चुके हैं। दरअसल, हम बात कर रहे हैं वाउ इडली के फाउंडर किशन तांती की, जो आज करियर के उस मुकाम तक पहुंच चुके है, जहां से हजारों युवा उनसे प्रेणना लेते है। आज से करीब 6 महीने पहले यानी साल 2025 की शुरुआत से हाइजिन का ध्यान रखते हुए नया स्टार्टअप चलाने वाले 25 वर्षीय युवा का ड्रीम प्रोजेक्ट काफी बड़ा है। शुरू के दिनों में उन्हें इडली के बिजनेस से लगभग 2000 की कमाई हुई, जो आज बढ़कर लगभग 50 हजार तक पहुंच चुकी है।
इन 6 महीने में उन्होंने खुद के दम पर ये मुकाम हासिल कर है कि वो जिस दिन जहां इडली बेचने जाते हैं, लोग उनका बड़ी बेसब्री से इंतजार करते है। जिनमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग हर वर्ग के ग्राहक शामिल है।
आसान नहीं रहा सफर
हालांकि, ये आज पढ़ने या सुनने में बहुत अच्छा लग रहा होगा, लेकिन इसके पीछे किशन तांती का बहुत अधिक संघर्ष रहा है। एक वक्त ऐसा था जब इन्होंने उन दिनों का सामना किया था जब इनकी मां की इलाज के पैसे नहीं थे और मालिक ने रुपए उधार देने से इंकार कर दिया था। केवल इतना ही नहीं, पिछले साल किशन मानसिक तनाव का शिकार भी हो गए थे, जिस कारण इन्होंने नकारात्मक विचारों का भी सामना किया। उस दौरान उनके मित्र और परिवार वालों ने उनका बहुत साथ दिया। साथ ही उन्हें इस परिस्थित से बाहर निकाला, जहां से उनका नया चेप्टर शुरू हुआ और आज उनका हौसला इतना बुलंद है कि वह अब खुद का कैफे खोलना चाहते है। इसके साथ ही, वह अपने आस पास के युवाओं को रोजगार भी देना चाहते है। इसके लिए वह लगातार दिन दोगुनी रात चौगुनी मेहनत कर रहे हैं।
देखें कई उतार-चढ़ाव
सफलता के रास्ते में हर एक कदम उतार चढ़ाव भरा रहता है। जिससे हमेशा सीखने को ही मिलता है। ऐसा ही कुछ किशन तांती के साथ भी हुआ। बिजनेस में हाथ लगाने से पहले उन्हें ये बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वह आज लोगों के बीच इतने खास बन जायेंगे कि हर कोई उनकी इडली के स्वाद का दीवाना बन जाएगा। बाकी अन्य रेस्टोरेंट में इडली का एक प्लेट 50 से 60 रूपये तक बिकता है, लेकिन वाव इडली द्वारा आप 20 रुपए में 1 प्लेट खा सकते है, जिसमें 3 पिस मिल जाता है। जहां एक ओर फास्ट फूड से तमाम तरह की बीमारियों को लोग दावत देते है तो वहीं यहां हाइजिन का विशेष ध्यान रखा जाता है। वाव इडली में आपको घर की बनी हुई चटनी और सांभर मिलती है, जिसे घरवालों की मदद से तैयार किया जाता है।
पर्सनल लाइफ
किशन तांती के पर्सनल लाइफ की बात करें तो उनका जन्म बहुत ही साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता गली मोहल्ले नुक्कड़ पर जा गोलगप्पे बेचा करते थे। जिनसे उनके परिवार का भरण पोषण होता था। परिवार में किशन के अलावा उनके बड़े भाई, माता, पिता और छोटी बहन रहती हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्हें 12वीं की पढ़ाई छोड़नी पड़ी। जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी संभालते हुए किशन ने कंपाउंडर के तौर पर नोकरी शुरू की, जहां उन्हें 1 दिन का 40 रुपया मिलता था। करीब 2 साल बाद उन्होंने एक लैबोरेट्री ज्वाइन किया। इसके बाद फिर वह खुद का कैमरा खरीदे और शादी पार्टी में फोटो वीडियो शूट करने लगे। लॉकडाइन से पहले उन्होंने यूटअब पर खुद का एक चैनल बनाया जिसमें सबस्क्राइबर्स पहुंचे लेकिन एक दिन अचानक उनके चैनल को टर्मिनेट कर दिया गया। तब भी उन्होंने हार नहीं मानी और स्टेशन में जा कर खाना बेचने लगे। हालांकि यह बिजनेस भी उनका 1 महीने से ज्यादा नहीं चल पाया। चारों तरफ से निराश और हताश होती ही वो डिप्रेशन का शिकार हो गए। लगभजी 3 महीने बाद वापस अब कुछ सामान्य हुआ, तब उन्होंने इडली का बिजनेस शुरू किया। जिसके लिए उन्होंने करीब 3 से 5 हजार इन्वेस्ट किए। देखते ही देखते उनकी कड़ी मेहनत ने आज उन्हें सफल बना दिया है।
इन लोगों ने दिया साथ
अपने करियर के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनके हर समय और हर मुश्किल में दोस्त रितिक, गुड्डू, संदीप खड़े थे। आसिफ अली ने अपनी पूरी टीम के साथ एक वेबसाइट गिफ्ट की, जोकि मोगमा के रहने वाले हैं। वहीं, आयुष राणा और सुमित ने भी उनके सपोर्ट में हर वक्त रहे है। इसके अलावा, फेसबुक, यूट्यूब व इंस्टाग्राम के फॉलोअर्स का भरपूर प्यार मिला है। इस बिजनेस को शुरू करने में मां (गीता देवी), पापा (अनिल तांती), नानी (रामबती देवी), बड़ा भाई (सूरज तांती), भाभी (शिमा देवी) और बहन (राधा कुमारी) का सबसे अधिक सहयोग रहा है। आगे उन्होंने बताया कि मैंने गर्मी की कड़ी धूप, बारिश और कड़कड़ाती ठंड में अपने काम को जारी रखा। आज आलम यह है कि रोजाना करीब 400 पीस इडली ऑन लोकेशन जाते ही बिक जाती हैं। कई बार बहुत अधिक ग्राहकों को खाली हाथ भी लौटना पड़ता है।






