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प्राचीन समय में इस्तेमाल होते थे ये प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन, आप भी घर पर आसानी से बना सकते हैं ये केमिकल फ्री प्रोडक्ट्स

Written by:Shruty Kushwaha
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हमारे देश के सौंदर्य प्रसाधनों की कुछ ख़ास विशेषताएँ थीं, जो सुंदरता बढ़ाने के साथ बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद बनाती थीं। ये सौंदर्य प्रसाधन पूरी तरह से प्राकृतिक तत्वों पर आधारित होते थे और भारतीय आयुर्वेदिक परंपरा के अनुसार तैयार किए जाते थे। इनमें मुख्य रूप से जड़ी-बूटियाँ, फूल, तेल और प्राकृतिक खनिजों का उपयोग होता था।
प्राचीन समय में इस्तेमाल होते थे ये प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन, आप भी घर पर आसानी से बना सकते हैं ये केमिकल फ्री प्रोडक्ट्स

Ancient Indian beauty secrets : ऐसा कौन है जो सुंदर दिखना नहीं चाहता। सौंदर्य सबको लुभाता है और यही वजह है कि सदियों से लोगों में सुंदर दिखने की चाहत बनी रही है। बात करें हमारे देश की तो यहां प्राचीनकाल से महिलाएं और पुरुष दोनों सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करते आए हैं। उस समय सुंदरता बढ़ाने के लिए प्राकृतिक और आयुर्वेद आधारित वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता था। ये वस्तुएं प्रकृति से प्राप्त की जाती थी और यही वजह थी कि उनका कोई नुक़सान नहीं होता था।

आज के समय में हमारे पास बाज़ार में हजारों किस्म के ब्यूटी प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं। लेकिन केमिकल आधारित कॉस्मेटिक्स के कई नुक़सान भी हो सकते हैं। हालांकि, कई ब्रांड्स ऐसे भी हैं जो प्राकृतिक तत्वों से प्रोडक्ट्स बनाने का दावा करते हैं। लेकिन अगर विकल्प मौजूद हैं तो बाज़ार पर भरोसा करने की बजाय हम घर पर ही थोड़ी सी मेहनत से कुछ ऐसे सौंदर्य प्रसाधन तैयार कर सकते हैं, जो सस्ते भी होंगे और जिनसे किसी तरह का नुक़सान होने की आशंका भी नहीं रहेगी।

पुराने समय में सौंदर्य का रहस्य थीं ये वस्तुएं

प्राचीन भारत में सौंदर्य प्रसाधन प्राकृतिक तत्वों और आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित होते थे। सौंदर्य प्रसाधनों का उद्देश्य न केवल बाहरी सुंदरता बढ़ाना था, बल्कि स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखना भी था। इन प्रसाधनों में मुख्य रूप से जड़ी-बूटियाँ, खनिज, फूल और विभिन्न प्राकृतिक तेलों का उपयोग होता था। ये वस्तुएं आज भी आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं और थोड़ी सी मेहनत कर हम इन्हें घर पर बना सकते हैं। आज हम ऐसे ही कुछ होममेड ब्यूटी प्रोडक्ट्स के बारे में जानेंगे।

  1. उबटन: उबटन त्वचा को निखारने और इसे स्वस्थ रखने के लिए इस्तेमाल होता था। कई लोग आज भी इसे बनाकर इस्तेमाल करते हैं। विवाह और अन्य विशेष अवसरों पर इसका ख़ासतौर पर उपयोग होता था। इसमें हल्दी, बेसन, चंदन, और दूध जैसी सामग्री होती हैं, जो त्वचा की गहराई से सफाई करती है और चमक बढ़ाती है।
  2. काजल: आँखों को सुंदर बनाने और ठंडक प्रदान करने के लिए लंबे समय से काजल का प्रयोग किया जाता रहा है। पहले इसे प्राकृतिक सामग्री, जैसे घी और बादाम से तैयार किया जाता था। काजल का उपयोग न केवल आँखों की सुंदरता के लिए, बल्कि उनकी सुरक्षा के लिए भी किया जाता था।
  3. मेहंदी: मेहंदी का उपयोग हाथों और बालों को सजाने और रंगने के लिए किया जाता था। हाथ पैरों में सुंदर मेहंदी की डिज़ाइन। बनाई जाती थी वहीं बालों को प्राकृतिक काला रंग देने के लिए इसे विशेष रूप से पसंद किया जाता था। मेहंदी के औषधीय गुण त्वचा और बालों के लिए लाभकारी होते थे।
  4. चंदन : चंदन का पेस्ट त्वचा की देखभाल के लिए प्राचीन समय से ही प्रसिद्ध रहा है। यह त्वचा को ठंडक प्रदान करता है और इसे मुलायम बनाता है। इसका उपयोग खासकर गर्मियों में त्वचा को सूर्य की गर्मी से बचाने के लिए किया जाता था।
  5. आंवला तेल: बालों को मजबूत और घना बनाने के लिए आंवला तेल का उपयोग किया जाता था। यह बालों की जड़ों को पोषण देने और उन्हें चमकदार बनाने के लिए प्रभावी माना जाता था।
  6. तेल मालिश: बालों की देखभाल के लिए नारियल तेल, तिल का तेल और आंवला तेल का उपयोग भी किया जाता था। नारियल और तिल का तेल बालों को पोषण देने के साथ-साथ सिर की मालिश में भी सहायक होते थे, जो रक्त परिसंचरण में सुधार लाते थे।
  7. सुगंधित इत्र: गुलाब चमेली और अन्य सुगंधित फूलों से बने इत्र का उपयोग सुगंध और त्वचा को ताजगी देने के लिए किया जाता था। ये प्राकृतिक सुगंध भारतीय संस्कृति में विशेष स्थान रखती थीं और धार्मिक अनुष्ठानों में भी इनका उपयोग होता था।

(डिस्क्लेमर : ये लेख विभिन्न स्त्रोतों से प्राप्त जानकारियों पर आधारित है। हम इसे लेकर कोई दावा नहीं करते हैं।)

 

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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