नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र अपने दूसरे और अंतिम चरण में है, लेकिन विपक्षी दलों के लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है। इस गतिरोध के चलते कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य अटके हुए हैं। अब केंद्र सरकार ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए एक अहम प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत सप्ताह के अंत में भी सदन की बैठकें आयोजित की जा सकती हैं।
सरकार ने विपक्ष के समक्ष यह विचार रखा है कि मार्च महीने के आखिरी सप्ताह में शनिवार (28 मार्च) और रविवार (29 मार्च) को भी संसद की कार्यवाही चलाई जाए। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन सरकारी बिलों को समय पर पारित कराना है, जो हंगामे की वजह से सदन में पेश नहीं हो सके हैं।
क्यों पड़ी वीकेंड पर बैठक की जरूरत?
दरअसल, संसद का कामकाज प्रभावित होने के पीछे दो मुख्य कारण हैं। पहला, विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार हंगामा कर रहे हैं, जिससे प्रश्नकाल से लेकर अन्य विधायी चर्चाएं भी सुचारू रूप से नहीं चल पा रही हैं। दूसरा, मार्च और अप्रैल की शुरुआत में गुड़ी पड़वा, उगादी, ईद और रामनवमी जैसे त्योहारों के कारण कई सरकारी छुट्टियां हैं, जिससे कार्य दिवसों की संख्या और कम हो जाएगी। इन्हीं वजहों से सरकार चाहती है कि वीकेंड का उपयोग करके कामकाज के नुकसान की भरपाई की जाए।
2 अप्रैल को समाप्त होगा सत्र
संसद का यह बजट सत्र दो चरणों में आयोजित किया गया है। पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चला था, जबकि दूसरा चरण 9 मार्च को शुरू हुआ और 2 अप्रैल को इसका समापन होना है। सत्र खत्म होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, और सरकार के पास कई अहम बिल लंबित हैं, जिन्हें इसी सत्र में पास कराना जरूरी है।
“आप कहते हैं कि बोलने का अवसर नहीं मिलता। जब आपको बात रखने का समय और अवसर दिया जाता है, तब आप बोलना ही नहीं चाहते। सदन में गतिरोध पैदा करना चाहते हैं जो संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है।”- ओम बिरला, लोकसभा स्पीकर
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन में हंगामा कर रहे सांसदों से कई बार कार्यवाही चलने देने की अपील की है। उन्होंने शुक्रवार को भी विपक्षी सदस्यों से कहा कि वे गतिरोध पैदा करने के बजाय चर्चा में भाग लें, लेकिन उनकी अपील का खास असर नहीं दिखा। अब देखना यह होगा कि विपक्ष सरकार के इस वीकेंड प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है।






