नई दिल्ली: कथित ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में फंसी तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सांसद महुआ मोइत्रा को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से आंशिक राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के दिसंबर 2023 के फैसले के उस हिस्से पर रोक लगा दी है, जिसमें लोकपाल को सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी पर फिर से विचार करने की अनुमति दी गई थी।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने लोकपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने इस मामले में महुआ मोइत्रा को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और भाजपा सांसद व इस मामले के मुख्य शिकायतकर्ता निशिकांत दुबे को भी नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
हाईकोर्ट के इस हिस्से पर लगी रोक
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के 19 दिसंबर, 2023 के फैसले के पैराग्राफ 89 के संचालन पर रोक लगाई है। हाईकोर्ट ने अपने इस पैराग्राफ में कहा था, “लोकपाल से अनुरोध है कि वे लोकपाल अधिनियम की धारा 20 के तहत मंजूरी देने पर विचार करें। यह विचार पूरी तरह से कानून के उन प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए, जिनकी व्याख्या ऊपर की गई है। और यह विचार आज से एक महीने की अवधि के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।”
इसी निर्देश को लोकपाल ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर अब शीर्ष अदालत ने रोक लगा दी है। इसके साथ ही, बेंच ने लोकपाल अधिनियम की धारा 20 के तहत शक्तियों और प्रक्रियाओं से संबंधित याचिकाओं के एक समूह पर भी नोटिस जारी किए।
क्या था पूरा घटनाक्रम?
यह मामला तब शुरू हुआ जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा ने कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से पैसे और महंगे तोहफे लेकर लोकसभा में सवाल पूछे थे। इस शिकायत पर लोकपाल ने पिछले साल 12 नवंबर को CBI को महुआ मोइत्रा के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच करने और मंजूरी देने का आदेश दिया था।
महुआ मोइत्रा ने लोकपाल के इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने 19 दिसंबर, 2023 को लोकपाल के आदेश को रद्द कर दिया, लेकिन साथ ही लोकपाल को नए सिरे से मंजूरी पर विचार करने की अनुमति भी दे दी। हाईकोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ लोकपाल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप किया है।





