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महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद पर सख्ती! गड़बड़ी पर 25 लाख तक जुर्माना, रोज 50 क्विंटल खपत

Written by:Bhawna Choubey
Published:
उज्जैन के महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां अब शुद्धता और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। सख्त नियमों और भारी जुर्माने के साथ प्रसाद व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा रहा है।
महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद पर सख्ती! गड़बड़ी पर 25 लाख तक जुर्माना, रोज 50 क्विंटल खपत

महाकालेश्वर मंदिर में मिलने वाला लड्डू प्रसाद अब सिर्फ आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि गुणवत्ता और शुद्धता का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। मंदिर समिति ने प्रसाद निर्माण को लेकर ऐसे सख्त नियम लागू किए हैं, जो सीधे तौर पर श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़े हैं। अब अगर प्रसाद बनाने में किसी भी तरह की लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं और उनकी आस्था इस प्रसाद से जुड़ी होती है।

रोजाना 50 क्विंटल प्रसाद की खपत

महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद की मांग लगातार बढ़ रही है। सामान्य दिनों में जहां करीब 50 क्विंटल लड्डू रोजाना तैयार और वितरित किए जाते हैं, वहीं विशेष पर्वों और त्योहारों के दौरान यह आंकड़ा 100 क्विंटल तक पहुंच जाता है। इतनी बड़ी मात्रा में प्रसाद तैयार करना अपने आप में एक बड़ी जिम्मेदारी है। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति ने अब पूरी व्यवस्था को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने का निर्णय लिया है, ताकि हर श्रद्धालु को एक जैसा शुद्ध और सुरक्षित प्रसाद मिल सके।

लड्डू प्रसाद में गड़बड़ी पर लाखों का जुर्माना

महाकाल मंदिर लड्डू प्रसाद को लेकर जो सबसे बड़ा बदलाव हुआ है, वह सख्त दंड व्यवस्था है। अब अगर प्रसाद निर्माण में किसी भी प्रकार की गंभीर लापरवाही पाई जाती है, तो 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि घटिया या कच्चे माल का उपयोग किया गया, तो 5 लाख रुपये तक की सजा तय की गई है। वहीं, अगर प्रसाद के पैकेट में वजन कम पाया गया, तो 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह व्यवस्था साफ संकेत देती है कि अब गुणवत्ता के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और हर स्तर पर सख्ती बरती जाएगी।

FSSAI की 5 स्टार रेटिंग, देश में बना उदाहरण

महाकालेश्वर मंदिर देश का पहला ऐसा मंदिर बन गया है, जहां लड्डू प्रसाद को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI द्वारा 5 स्टार रेटिंग दी गई है। यह रेटिंग इस बात का प्रमाण है कि यहां प्रसाद निर्माण में गुणवत्ता और स्वच्छता के सभी मानकों का पालन किया जा रहा है। इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए मंदिर प्रशासन अब और भी सतर्क हो गया है और हर स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

पारंपरिक विधि और शुद्ध सामग्री से तैयार होता है प्रसाद

महाकाल मंदिर का लड्डू प्रसाद अपनी खासियत के लिए जाना जाता है। इसमें देशी घी, बेसन, रागी, पिसी हुई शक्कर, सूखा मेवा, इलायची, केसर और जायफल जैसी सामग्री का उपयोग किया जाता है। सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार का प्रिजर्वेटिव या कृत्रिम रंग नहीं मिलाया जाता। प्रसाद को धीमी आंच पर लंबे समय तक भुना जाता है, जिससे उसका स्वाद और गुणवत्ता दोनों बेहतर होते हैं। इसके साथ ही मंत्रोच्चार के बीच इसे तैयार किया जाता है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है।

नई हाईटेक यूनिट से बदलेगा प्रसाद निर्माण का तरीका

महाकाल मंदिर लड्डू प्रसाद की बढ़ती मांग को देखते हुए अब एक नई और अत्याधुनिक यूनिट तैयार की जा रही है। यह यूनिट करीब 50 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बनाई जा रही है और इस पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसे त्रिवेणी संग्रहालय के पास बने अन्नक्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। यहां आधुनिक मशीनों के जरिए प्रसाद तैयार किया जाएगा, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

बड़े टेंडर के जरिए अनुभवी कंपनियों को जिम्मेदारी

मंदिर समिति ने वर्ष 2026-27 के लिए करीब 40 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया है। इस टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों के लिए भी सख्त नियम तय किए गए हैं। कंपनी के पास कम से कम 3 साल का अनुभव होना चाहिए और उसे FSSAI व ISO 22000 का प्रमाणन होना जरूरी है। साथ ही कंपनी का टर्नओवर भी 40 करोड़ रुपये से कम नहीं होना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल अनुभवी और भरोसेमंद कंपनियां ही इस जिम्मेदारी को निभाएं।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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