मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को हिला दिया। एक ‘पुलिस’ लिखी कार की टक्कर से एक परिवार की खुशियां पल भर में बिखर गईं। गुरुवार रात हुए इस हादसे में 50 वर्षीय मुकेश कुमावत की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि अन्य लोग घायल हो गए।
घटना के बाद सिर्फ एक हादसा नहीं हुआ, बल्कि गुस्से और दर्द का ऐसा विस्फोट हुआ जिसने प्रशासन को भी मुश्किल में डाल दिया। ग्रामीणों और परिजनों ने फोरलेन पर ही अंतिम संस्कार करने की जिद पकड़ ली, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए।
क्या है पूरा घटनाक्रम
यह पूरा मामला महू-नीमच फोरलेन के पलदुना फंटे का है। गुरुवार रात एक तेज रफ्तार कार, जिस पर ‘पुलिस’ लिखा हुआ था, ने पहले स्कूटी सवार मुकेश और उनके चाचा को टक्कर मारी। इसके बाद कुछ दूरी पर पैदल जा रहे एक अन्य रिश्तेदार को भी अपनी चपेट में ले लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार अनियंत्रित थी और टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कूटी सवार दूर जा गिरे। इसके बाद कार डिवाइडर से टकराकर रुकी। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
मुकेश कुमावत की हालत गंभीर थी, इसलिए उन्हें इंदौर रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाही के मुद्दे को सामने ला दिया है।
‘पुलिस’ लिखी कार पर सवाल, चालक कौन था?
इस हादसे का सबसे बड़ा सवाल यही है कि ‘पुलिस’ लिखी कार किसकी थी और उसे कौन चला रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि कार में एक एएसआई रैंक का पुलिसकर्मी मौजूद था, जबकि ड्राइविंग सीट पर उसका बेटा बैठा था।
हादसे के बाद कार सवार मौके से भाग गए, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। हालांकि पुलिस ने वाहन जब्त कर लिया है और जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक चालक की आधिकारिक पहचान सामने नहीं आई है।
फोरलेन पर ही अंतिम संस्कार की तैयारी
जैसे ही मुकेश की मौत की खबर गांव पहुंची, परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में फंटे पर जमा हो गए। उन्होंने सड़क किनारे टेंट लगा दिया और वहीं धरना शुरू कर दिया।
इतना ही नहीं, परिजनों ने फोरलेन पर ही अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर ली। लकड़ियां और कंडे तक मंगवा लिए गए। इस दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच तनातनी की स्थिति भी बनी।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। उनकी मुख्य मांग है कि मृतक के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
बार-बार हो रहे हादसे, फिर भी नहीं जाग रहा सिस्टम
स्थानीय लोगों के अनुसार, पलदुना फंटा कोई नया हादसा स्थल नहीं है। पिछले एक साल में यहां 10 से 12 लोगों की जान जा चुकी है। कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर स्थायी रूप से अपंग हो गए हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कई बार प्रशासन को शिकायत दी गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हर बार सिर्फ आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है। यह सवाल उठता है कि आखिर कब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे और जिम्मेदारी कौन लेगा?
प्रशासन और पुलिस की कोशिशें
मौके पर हालात संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। एएसपी, एडीएम, एसडीएम समेत कई अधिकारी ग्रामीणों को समझाने में जुटे रहे। प्रशासन ने शव को मेडिकल कॉलेज में रखवाया है, ताकि स्थिति सामान्य हो सके। हालांकि देर रात तक बातचीत जारी रही, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।






