कभी-कभी अपराध बाहर से नहीं, बल्कि अपने ही घर के अंदर से सामने आता है। आलोट के पिपलिया सिसोदिया गांव में हुई चोरी का मामला भी कुछ ऐसा ही निकला, जिसने पूरे इलाके को चौंका दिया। जिस घर में चोरी हुई, उसी घर का बेटा इस घटना का मास्टरमाइंड निकला।
यह आलोट चोरी मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि रिश्तों में भरोसे को झकझोर देने वाली कहानी है। मां और बहन के जेवर चोरी होने के बाद परिवार सदमे में था, लेकिन असली झटका तब लगा जब आरोपी अपने ही घर का सदस्य निकला।
आलोट चोरी केस का पूरा मामला क्या है
यह घटना 3 अप्रैल 2026 की रात की है, जब कन्हैयालाल पाटीदार के घर से उनकी मां और बहन के सोने के आभूषण चोरी हो गए थे। इसके बाद 6 अप्रैल को थाना आलोट में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आसपास के लोगों से पूछताछ की। शुरुआत में यह एक सामान्य चोरी का मामला लग रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर सच्चाई सामने आने लगी। इस आलोट पुलिस जांच में सबसे अहम सुराग पड़ोसियों से मिला, जिन्होंने बताया कि घटना की रात फरियादी का भाई राहुल पाटीदार गांव में देखा गया था।
पड़ोसियों के सुराग से खुला राज
पुलिस ने इस जानकारी को गंभीरता से लिया और आरोपी राहुल पाटीदार की तलाश शुरू की। राहुल पिछले चार साल से रतलाम के काटजू नगर में रह रहा था। पुलिस टीम रतलाम पहुंची और राहुल को हिरासत में लेकर पूछताछ की। शुरुआत में उसने टालमटोल की, लेकिन सख्ती से पूछताछ करने पर उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। यह खुलासा पूरे मामले का टर्निंग पॉइंट बना, क्योंकि इससे साफ हो गया कि यह कोई बाहरी चोरी नहीं थी, बल्कि अंदर की साजिश थी।
3 लाख के जेवर बरामद
पुलिस ने आरोपी के किराए के मकान से चोरी किए गए आभूषण बरामद कर लिए। जब्त किए गए गहनों में दो मंगलसूत्र और एक जोड़ी झुमकी शामिल हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 3 लाख रुपये बताई जा रही है। इस आलोट चोरी खुलासा मामले में पुलिस की तेजी और सटीक कार्रवाई ने बड़ी सफलता दिलाई। आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है। यह घटना यह भी दिखाती है कि पुलिस की सतर्कता और सही दिशा में जांच से बड़े से बड़ा मामला भी सुलझाया जा सकता है।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
इस पूरे मामले को सुलझाने में थाना आलोट पुलिस की अहम भूमिका रही। एसडीओपी पल्लवी गौर के मार्गदर्शन में टीम ने तेजी से काम करते हुए आरोपी तक पहुंच बनाई। थाना प्रभारी मुनेन्द्र गौतम और उनकी टीम की मेहनत से ही यह मामला जल्द सुलझ पाया। पुलिसकर्मियों की सतर्कता और टीमवर्क इस सफलता की बड़ी वजह रही। ऐसी कार्रवाई से लोगों का पुलिस पर भरोसा और मजबूत होता है।






