अपराजिता की बेल सूनी-सूनी लग रही है? बस गमले में डालिए आलू-सरसों वाला ये देसी घोल, फूलों से लद जाएगी बेल

अगर अपराजिता की बेल में फूल नहीं आ रहे हैं तो घबराइए नहीं! आपके किचन में ही इसका आसान और असरदार इलाज छिपा है। बस आलू के छिलकों और सरसों के बीज से बना ये खास देसी घोल डालिए और देखिए कैसे नीले-नीले फूलों से लद जाएगी आपकी अपराजिता।
Aparajita Plant

अक्सर लोग अपराजिता का पौधा (Aparajita Plant) तो घर में लगाते हैं, लेकिन कुछ महीनों बाद शिकायत करते हैं कि उसमें फूल ही नहीं आते। बेल सूनी लगती है, और लोग सोचते हैं शायद पौधा खराब हो गया है। लेकिन सच्चाई यह है कि थोड़ा सही पोषण और देखभाल इसे फिर से फूलों से भर सकता है।

इस समस्या का हल कहीं और नहीं बल्कि आपके किचन में ही मौजूद है। आलू के छिलके और सरसों के बीज से बना एक देसी घोल अपराजिता की बेल को नया जीवन दे सकता है। यह उपाय न सिर्फ सस्ता है बल्कि पूरी तरह नैचुरल और बेहद असरदार भी है।

किचन से निकला कमाल का फर्टिलाइज़र

आलू के छिलके और सरसों का पावरफुल घोल

अपराजिता की बेल को फूलों से भरने के लिए आपको चाहिए सिर्फ दो चीजें आलू के छिलके और सरसों का बीज पाउडर। सबसे पहले आलू के छिलकों को कुछ घंटों तक पानी में भिगो दें और फिर उसमें एक चम्मच सरसों पाउडर मिला दें। इस घोल को 24 घंटे के लिए छोड़ दें ताकि यह अच्छे से फर्मेंट हो जाए। फिर हर 10-15 दिन में इसे बेल की जड़ में डालें। इसमें मौजूद नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम पौधे की ग्रोथ और फ्लावरिंग को तेज़ी से बढ़ाते हैं।

फूलों की कमी का कारण समझिए

अगर अपराजिता में फूल नहीं आ रहे हैं, तो उसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे धूप की कमी, मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी या फिर पानी देने का गलत तरीका। ये बेल पूरी धूप चाहती है और उसे नियमित रूप से संतुलित पानी देना ज़रूरी होता है। साथ ही, मिट्टी में जैविक खाद और नैचुरल फर्टिलाइज़र मिलाना जरूरी है, ताकि बेल को ज़रूरी न्यूट्रिएंट्स मिलते रहें। यही कारण है कि आलू-सरसों का देसी घोल इसे तुरंत एनर्जी देने का काम करता है।

असरदार और भरोसेमंद घरेलू तरीका

देशभर के कई गार्डनिंग एक्सपर्ट्स और यूट्यूब पर प्लांट लवर्स ने इस उपाय की तारीफ की है। उनका मानना है कि अगर इस घोल का इस्तेमाल लगातार किया जाए तो 2-3 हफ्तों में ही असर दिखने लगता है। अपराजिता में न सिर्फ फूल आना शुरू होते हैं, बल्कि बेल भी घनी और हेल्दी हो जाती है। ये तरीका न सिर्फ असरदार है बल्कि पौधे को किसी भी केमिकल के बिना हेल्दी बनाए रखता है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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