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ये है दुनिया की पहली प्राइवेट रोड, इस सीधी सड़क पर ले सकते हैं शाही सफर का मजा!

Written by:Sanjucta Pandit
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दुनिया की सबसे सीधी सड़क की कहानी जितनी रोचक है, उतनी ही सीधी भी है। इसका निर्माण खास तौर पर एक राजा के लिए किया गया था, इसलिए इसे दुनिया की पहली प्राइवेट रोड के तौर पर भी जाना जाता है।

रोड, हाईवे और एक्सप्रेसवे की बात करें, तो यह एक स्थान को दूसरे स्थान तक जोड़ने का बेहतरीन माध्यम होता है। वाहन चालकों का समय बचाने के साथ ही एक राज्य से दूसरे राज्य को बेहतर कनेक्टिविटी देने के लिए हाईवे और एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है। जिसकी रखरखाव की जिम्मेदारी NHAI की होती है। आज हम आपको दुनिया की एक ऐसी सड़क के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बिल्कुल सीधी है। इसे बनवाने के लिए करोड़ों डॉलर रुपए खर्च किए गए हैं।

दरअसल, दुनिया की सबसे सीधी सड़क की कहानी जितनी रोचक है, उतनी ही सीधी भी है। इसका निर्माण खास तौर पर एक राजा के लिए किया गया था, इसलिए इसे दुनिया की पहली प्राइवेट रोड के तौर पर भी जाना जाता है।

दुनिया का पहला प्राइवेट रोड

बता दें कि दुनिया की सबसे सीधी सड़क की लंबाई 256 किलोमीटर है। इसमें एक भी मोड नहीं है, जो कि सऊदी अरब में स्थित है। इस रोड को ‘अबा-अल-खार्ज रोड’ के नाम से जाना जाता है। इसे खासतौर पर राजा के निजी उपयोग के लिए बनाया गया था, क्योंकि बिना रूके सफर करना उनका एक सपना था, जिसे पूरा करने के लिए इसका निर्माण कराया गया था। इसलिए इस सड़क को दुनिया की पहली प्राइवेट सड़क कहा जाता है।

चमक अभी भी बरकरार

इस सड़क पर एक भी मोड, स्पीड, ब्रेकर या फिर ट्रैफिक सिग्नल नहीं है। यह सीधे रेगिस्तान के बीचो-बीच फैली है और अंत तक सीधी बनी हुई है। इस सड़क को उस वक्त बनवाया गया था, जब राजा को बार-बार राजधानी से अपनी सैरगाह तक जाने के लिए बहुत अधिक वक्त लगता था। तब इस सड़क का निर्माण कराया गया। उस दौरान सऊदी इंजीनियरों ने इसे उसी अनुसार डिजाइन किया, ताकि गर्मी और रेत के बावजूद रेगिस्तान पर स्थितियों में भी इसकी गुणवत्ता बनी रहे। यही कारण है कि सालों बाद भी इस सड़क की चमक उसी तरह बरकरार है।

रॉयल रोड

इस सड़क की खास बात यह थी कि इसमें राजा के अलावा उनके खास मेहमान ही ट्रेवल कर सकते थे। आम जनता को इस पर चलने की इजाजत नहीं थी। इसलिए इस हाइवे को रॉयल रोड भी कहा जाता है। यह हाईवे 10 मार्ग हराद से शुरू होकर संयुक्त अरब अमीरात की सीमा के पास अल-बाथा तक जाता है। इसमें सफर करने के लिए लगभग 2 घंटे का समय लगता है। हालांकि, मोड नहीं होने के बावजूद इस पर एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है, क्योंकि रेगिस्तानी इलाके होने के कारण अक्सर यहां पर ऊंट घूमते रहते हैं, जो अचानक ही रोड पर आ जाते हैं।

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit
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