ऑफिस में चापलूस लोग बॉस के सामने नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं? जानें Premanand Ji Maharaj का जवाब

ऑफ़िस में अक्सर कुछ लोग चापलूसी कर बॉस का दिल जीतने की कोशिश करते हैं और मेहनती कर्मचारियों को नीचे धकेल देते हैं। प्रेमानंद जी महाराज का सरल लेकिन गहरा उत्तर बताता है कि ऐसे हालात से निपटने के लिए हमें क्या करना चाहिए।
Premanand Ji Maharaj

ऑफ़िस का माहौल कई बार किसी युद्धभूमि से कम नहीं होता है। जहाँ एक तरफ़ मेहनत, लगन और ईमानदारी से काम करने वाले लोग होते हैं तो वहीं दूसरी तरफ़ कुछ ऐसे भी लोग होते हैं जो सिर्फ़ चापलूसी और दिखावे के सहारे बॉस के क़रीब पहुँचने की कोशिश करते हैं। ऐसे में असली मेहनती कर्मचारियों को नीचा दिखाया जाने का डर और असुरक्षा की भावना परेशान करती है।

हाल ही में प्रेमानंद जी महाराज (Premanand Ji Maharaj) के प्रवचन में एक श्रोता ने यही सवाल किया कि महाराज जी ऑफ़िस में चापलूस लोग बॉस के सामने मुझे हमेशा नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं मैं क्या करूं, इस सवाल ने लाखों लोगों की ज़ुबान पर ताले तोड़ दिए क्योंकि यह समस्या लगभग हर नौकरीपेशा इंसान की हक़ीक़त होती है। आइए जानते हैं इस सवाल पर महाराज जी की सोचो समाधान क्या है।

चापलूसी का ऑफ़िस कल्चर

भारत ही नहीं दुनिया भर में कॉरपोरेट और सरकारी ऑफ़िस में चापलूस संस्कृति गहराई तक फैली हुई है। कुछ लोग बॉस की हर बात पर हाँ में हाँ मिलाकर, झूठी तारीफ़ करके, और दूसरों की कमियों को बढ़ा चढ़ाकर बताना अपनी जगह पक्की कर लेते हैं। ऐसा करने से अक्सर मंदी कर्मचारी पीछे रह जाते हैं। बॉस असली टैलेंट को पहचान ही नहीं पाता है। ऐसे में महंती कर्मचारी भी दिल्ली धीरे कमज़ोर बन जाते हैं और उनकी अंदर तनाव घर कर लेता है।

महाराज जी ने क्या जवाब दिया?

महाराज जी नहीं इस सवाल का जवाब देते हुए कहा है कि अगर आपको ऐसा लग रहा है कि आपके ऑफ़िस का माहौल कुछ ठीक नहीं है वहाँ कमज़ोर व्यक्ति बॉस की चापलूसी करता है, तो ऐसे में आपको दुनिया के असली बॉस को ख़ुश करने की कोशिश करना चाहिए। असली बॉस यानी हमारे ईश्वर। महाराज ने कहा कि नक़ली बॉस को तो कोई भी फँसा सकता है, लेकिन असली बॉस को ख़ुश करना मुश्किल होता है क्योंकि असली बॉस चापलूसी और सच्चाई में फ़र्क समझते हैं।

उन्होंने कहा कि ऑफ़िस के नक़ली बॉस के सामने कोई चाहे कितनी भी चापलूसी क्यों न कर ले लेकिन असली बॉस के सामने कोई भी चापलूसी नहीं चल सकती। जब आप भगवान को ख़ुश रखेंगे तो आपको अपने ऑफ़िस में बॉस को ख़ुश रखने की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी, क्योंकि जब हम पर भगवान की कृपा होती है तो हमें किसी भी इंसान की कृपा नहीं चाहिए होती है क्योंकि इंसान कभी भी किसी पर कृपा नहीं करता है इंसान स्वार्थी होता है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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