Adventures Destinations: जनवरी महीने में एडवेंचर के साथ लें सर्दियों के मजे, भारत के इन जगहों की करें सैर

Adventures Destinations: जनवरी महीने में एडवेंचर के साथ लें सर्दियों के मजे, भारत के इन जगहों की करें सैर

Adventures Destinations : घूमने के शौकीन लोगों को अगल-अलग मौसम में घूमना पसंद होता है। जो अक्सप ट्रैवलिंग करते रहते हैं। उन्हें नई-नई जगहों का सैर करना काफी पसंद होता है। किसी को पहाड़ों की वादियों में घूमना अच्छा लगता है, तो किसी को धार्मिक स्थलों का भ्रमण करना, किसी को समुद्र का किनारा भाता है, तो किसी को रेगिस्तान की तपती गर्मी का लुफ्त उठाना अच्छा लगता है। बता दें कि टूरिस्म भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है क्योंकि भारत एक ऐसा देश है जहां देश ही नहीं बल्कि दुनिया के हर कोने-कोने से लोग यहां की खुबसुरती का दिदार करने आते हैं। यहां मौसम के हिसाब से भ्रमण किया जाता है। लोग सीजन के हिसाब से अपना टूर डिसाइड करते हैं। तो चलिए आज के इस खास आर्टिकल में हम आपको जनवरी महीने में घूमने वाले जगहों के बारे में बताते हैं और बताते हैं आपको उन जगहों के बारे में जहां आप इस मौसम में घूमने जा सकते हैं। इस मौसम में भी अगर आप एडवेंचर ट्रिप का आनंद उठाना चाहते हैं, इन जगहों की सैर कर सकते हैं।

उडुपी

जनवरी महीने में अगर आप अपने दोस्त, परिवार या पार्टनर के साथ मौसम का मजा लेना चाहते हैं तो आप उडुपी की सैर कर सकते हैं। यह खूबसूरत पर्यटन स्थल कर्नाटक के उडुपी जिले में है। उडुपी कृष्ण मंदिर, तुलु अष्टमथा के लिए उल्लेखनीय है। जिसका नाम यहां के फेसम व्यंजन के नाम पर रखा गया है। बता दें यहां के लोग भगवान परशुराम को बहुत ज्यादा मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं क्योंकि यह क्षेत्र उन्हीं के नाम से जाना जाता है। यहां पर घूमने के लिए कानाकाणा किंडी प्रसिद्ध जगह है, जहां जाकर आपको आनंद का अहसास होगा। इसलिए आप ठंड में मौसम में कुछ अलग करना चाहते हैं तो यहां जरूर जाएं।

राजमाची

यह स्थान महाराष्ट्र में स्थित है जो कि अपनी सभ्यता और संस्कृति के लिए जाना जाता है। इस गांव में 2 बहुत पूरानी किला है जो कि लोनावला और खंडाला पहाड़ी के बीच स्थित है। यहां जाने पर स्वर्ग का अहसास होता है। यहां देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग घूमने आते हैं। इस किले का निर्माण सातवाहन राजवंश ने करवाया था। इस किले की इतिहास की बात करें तो छत्रपति शिवाजी महाराज ने आदिल शाह के साथ युद्ध करके इस किले को जीत लिया था। जिसके बाद अंग्रेजों ने इसपर कब्जा कर लिया। वहीं, देश की आजादी के बाद इस किले को प्राचीन विरासत स्थल और महाराष्ट्र में एक संरक्षित स्मारक के रूप में घोषित किया गया। जहां हर सीजन में लोगों का आना- जाना लगा रहता है। यहां का मौसम भी सुहाना रहता है। इसलिए अगर आप कुछ अलग ट्राई करने की सोच रहे हैं तो यहां पर घूमने जा सकते हैं।

सुन्दरवन

सुन्दरवन वैसे तो भारत और बांग्लादेश के बीच में स्थित है जो कि विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा नदी है। यह गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना नदी के डेल्टा पर स्थित समूह है। यहां का बंगाल टाइगर विश्वभर में प्रसिद्ध है। बता दें इस वन का नाम सुन्दरी के नाम पर पड़ा है। यहां पर जो वन है वो अक्सर ही कुहासे की चादर से ढका रहता है। भयावय जीव इसमें रहते हैं। जिसे देखने के लिए लोग दूर- दराज से यहां आते हैं और बोट में सवार होकर यहां की सैर करते हैं। यहां पर देखने के लिए कनक, सुधान्याखाली वाच टावर, हॉलिडे आइलैंड, कटका सुंदरवन है। जहां आपको देखने के लिए काफी कुछ मिल जाएंगे। इसलिए अपने फैमिली, फ्रैंड्स के साथ यहां जरूर जाएं।

हरिश्चंद्रगढ़

हरिशचन्द्रगढ़ भारत के अहमदनगर जिले में स्थित है। जो कि पहाड़ों के बीच बनाया गया है। जिसका इतिहास काफी रोमांचित है। इस दुर्ग का निर्माण 6वीं शताब्दी में कलचुरी राजवंश ने किया था। जिसके बाद इस किले में गुफाएं बनाई गई। जिसमें भगवान विष्णु की मूर्तियाँ हैं। अगर आप अपने परिवार के साथ घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आप यहां जरूर जाएं। यहां आपको धार्मिक का आनंद भी मिलेगा साथ ही पहाड़ की वादियों में भी घूमने का मौका मिलेगा।

Sanjucta Pandit
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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