त्योहारों की मिठाइयों में अब नहीं रहेगा नॉन-वेज का डर, बेफिक्र होकर बनाएं घर की थाली की शान!

त्योहारों में मिठाइयों पर जड़ा चांदी का वर्क अब पूरी तरह शाकाहारी हो चुका है। बता दें कि आज भी जब किसी मिठाई पर वह पतली-सी चांदी की परत नजर आती है, तो हम सबके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है।
Kaju Katli

त्योहारों का मौसम आते ही घरों में खुशियों की रौनक बढ़ जाती है। बाजारों में रंग-बिरंगी रोशनी, मिठाइयों की सुगंध और रिश्तों में मिठास घुल जाती है। कोई बर्फी खरीदता है, तो कोई लड्डू… इन सबमें सबसे ज्यादा फेमस काजू कतली है। किसी भी स्पेशल ऑकेशन में यह हर घर की थाली की शान होती है। इन सबके ऊपर जड़ी चमचमाती पतली परत यानी चांदी का वर्क मिठाई को खास बना देती है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह चांदी का वर्क शुद्ध शाकाहारी होता है या नहीं? कई लोगों के मन में यह सवाल वर्षों से उठता रहा है। दिखने में भले यह परत बेहद खूबसूरत लगती हो, लेकिन कभी इसे बनाने का तरीका काफी अलग है।

क्या है सिल्वर वर्क?

सिल्वर वर्क बेहद पतली चांदी की पन्नी होती है, जो खाने लायक होती है। यह मिठाई के स्वाद या गंध पर कोई असर नहीं डालती। यह मिठाई को आकर्षक बनाती है। पारंपरिक रूप से इसे कारीगर हाथ से तैयार करते थे। असली चांदी के छोटे टुकड़ों को हथौड़े से पीट-पीटकर इतना पतला बनाया जाता था कि वह कागज से भी महीन दिखे। इसके बाद इसे बड़ी सावधानी से मिठाइयों पर चिपकाया जाता था, ताकि उनकी चमक बढ़ सके।

कई परिवार मानते हैं कि बिना सिल्वर वर्क के मिठाई अधूरी लगती है। काजू कतली, पेड़ा, बर्फी या मिल्क केक इन सभी पर यह परत शाही एहसास देती है, लेकिन इसका सफर हमेशा इतना आसान नहीं रहा है। एक वक्त ऐसा भी थी, जब लोग इसे खाने से कतराते थे।

कभी विवादों में रहा

पुराने समय में जब यह परंपरा शुरू हुई थी, तब कारीगर चांदी को पतला करने के लिए कागज की जगह जानवरों की खाल या आंतों का इस्तेमाल करते थे। इससे चांदी के टुकड़े आसानी से फैल जाते थे और फटते नहीं थे। इस प्रक्रिया में सीधे तौर पर मांस का उपयोग नहीं होता था, लेकिन इसमें पशु-उत्पाद शामिल होने से शाकाहारियों में असमंजस पैदा हो जाता था। कई धार्मिक परिवारों ने ऐसे चांदी का वर्क लगी मिठाइयों से दूरी बना ली थी। यहां तक कि कुछ धार्मिक आयोजनों और मंदिरों में इस मिठाई के चढ़ाने पर रोक लगा दी गई थी।

बदलते वक्त के साथ आया बड़ा सुधार

साल 2016 में इस विवाद पर विराम लगा। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने आदेश जारी किया कि खाने योग्य चांदी की परत के निर्माण में किसी भी प्रकार के पशु उत्पाद या अंगों का उपयोग नहीं किया जाएगा। आज आधुनिक तकनीक की मदद से इसका उत्पादन पूरी तरह मशीनों से होता है। चांदी को पार्चमेंट पेपर या सिंथेटिक शीट के बीच पीटा जाता है, जिससे यह पतली परत बन जाती है।

कैसे करें पहचान

  • पैक्ड मिठाइयों पर आजकल ‘100% Vegetarian Silver Work’ या ‘Vegetarian Vark’ जैसे लेबल लगे होते हैं।
  • स्थानीय दुकान पर मिठाई लेते समय खुलकर पूछें कि वर्ख मशीन से बना है या पारंपरिक तरीके से।
Sanjucta Pandit
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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