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नवरात्रि व्रत करने का सही तरीका, जानें प्रेमानंद जी महाराज के बताए नियम

Written by:Bhawna Choubey
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नवरात्रि व्रत का महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर और मन को शुद्ध करने का भी तरीका है। प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि नवरात्रि के व्रत करते समय किन नियमों का पालन जरूरी है ताकि मां दुर्गा की कृपा प्राप्त हो और साधना सफल हो सके।
नवरात्रि व्रत करने का सही तरीका, जानें प्रेमानंद जी महाराज के बताए नियम

भारत में नवरात्रि सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि का अनोखा अवसर माना जाता है। इस दौरान मां दुर्गा की उपासना पूरे विधि-विधान से की जाती है और भक्त व्रत रखकर देवी को प्रसन्न करते हैं। लेकिन अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि आखिर व्रत सही तरीके से कैसे रखा जाए ताकि पूजा का फल पूर्ण रूप से मिले।

इसी सवाल का जवाब हाल ही में प्रेमानंद जी महाराज ने अपने प्रवचन में दिया। उन्होंने विस्तार से बताया कि नवरात्रि व्रत के दौरान किन नियमों का पालन करना जरूरी है और किन चीजों से परहेज करना चाहिए। महाराज का मानना है कि व्रत केवल खान-पान से जुड़ा नियम नहीं है, बल्कि यह मन, वाणी और आचरण को शुद्ध करने का भी साधन है।

नवरात्रि व्रत का महत्व और उद्देश्य

नवरात्रि में रखा जाने वाला व्रत केवल भूखे रहने या हल्का भोजन करने का नाम नहीं है। इसका असली उद्देश्य आत्मसंयम और साधना के जरिए मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करना है। शास्त्रों में भी उल्लेख मिलता है कि जो भक्त पूरी निष्ठा और नियमों के साथ व्रत रखता है, उसे देवी दुर्गा की विशेष कृपा मिलती है।

धार्मिक दृष्टि से नवरात्रि के नौ दिन देवी के नौ रूपों की पूजा के लिए समर्पित होते हैं। हर दिन अलग-अलग स्वरूप की साधना की जाती है और व्रत इसका आधार बनता है। इस दौरान व्यक्ति अपने अंदर की नकारात्मकता से दूरी बनाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

प्रेमानंद जी महाराज के बताए व्रत के नियम

1. आहार में संयम

महाराज का कहना है कि व्रत के दौरान सात्विक भोजन का पालन करना अनिवार्य है। इसमें फल, दूध, सूखे मेवे और सेंधा नमक से बनी वस्तुएं शामिल हों। प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से पूरी तरह बचना चाहिए। इससे मन की शुद्धि बनी रहती है और साधना सफल होती है।

2. मन और वाणी पर नियंत्रण

सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि मन और वाणी पर भी संयम जरूरी है। व्रत के समय क्रोध, कटु शब्द या नकारात्मक विचारों से दूरी बनानी चाहिए। महाराज ने बताया कि भक्ति तभी सार्थक होती है जब साधक का मन शांत और स्थिर रहे।

3. पूजा-पाठ और नियमों का पालन

हर दिन देवी की आरती, मंत्रजाप और पाठ करना व्रत का हिस्सा है। सूर्योदय से पहले स्नान करना, स्वच्छ वस्त्र पहनना और घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करना जरूरी है। महाराज के अनुसार, व्रत का असली फल तभी मिलता है जब भक्त पूरी श्रद्धा और विधि से पूजा करे।

व्रत के दौरान किन चीजों से बचें

नवरात्रि व्रत के दौरान कुछ विशेष सावधानियां भी बरतनी चाहिए। महाराज ने कहा कि मांसाहार, शराब और नशे जैसी चीजों से पूरी तरह दूरी बनाना चाहिए। साथ ही, दूसरों का अपमान करना या किसी को कष्ट पहुँचाना व्रत की पवित्रता को भंग करता है।

उन्होंने यह भी बताया कि व्रत को दिखावा बनाने की बजाय इसे आत्मानुशासन और साधना का माध्यम मानना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति नियमों का पालन नहीं करता और केवल खान-पान तक सीमित रहता है, तो उसका व्रत अधूरा माना जाता है।