
अक्सर नागरिकों को सरकार की व्यवस्था से शिकायत होती है। यदि संविधान हर नागरिक को कुछ मौलिक अधिकार देता है तो कुछ मौलिक कर्तव्यों को भी निर्धारित किया गया है। जिसका पालन हर व्यक्ति को करना चाहिए। ऐसा करके प्रत्येक व्यक्ति अपने समाज और देश को सुधारने में विशेष योगदान दे सकता है। यदि आपको प्रशासन से कोई शिकायत है या आप इसमें कुछ बदलाव करना चाहते हैं, तो इसके लिए जनहित याचिका (PIL) का इस्तेमाल कर सकते हैं।
पीआईएल एक कानूनी उपाय है, जो आम नागरिक या किसी संस्थान को जनता के हित में कोर्ट में याचिका दायर करने की सुविधा प्रदान करता है। ध्यान रखें आप पर्सनल शिकायतों के लिए इस सुविधा का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इसे केवल वह व्यक्ति या संस्थान दायर कर, जो उसे मामले से प्रभावित न हो।
इन मामलों के लिए दायर कर सकते हैं पीआईएल
भ्रष्टाचार, प्रदूषण, सामाजिक, मौलिक अधिकारों के उल्लंघन और एनवायरमेंट से जुड़े मामलों को लेकर आप पीआईएल दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए सबूत और तथ्यों के साथ जरूरी डॉक्यूमेंट की जरूरत भी पड़ती है। याचिका दायर करने से पहले इस बात को क्लियर कर लें कि आपकी समस्या क्या है और आप अदालत से क्या मांग करना चाहते हैं। पूरा मामला सही से याचिका में लिखें। यदि मामला बड़ा होता है तो कोर्ट प्राथमिक रूप से इसकी सुनवाई करता है। सामाजिक कार्यकर्ता, एनजीओ के साथ-साथ कोई भी भारतीय नागरिक इस सार्वजनिक हित में सुविधा का लाभ उठा सकता है।
कैसे और कहाँ दायर करें जनहित याचिका?
राज्य सरकार, प्रशासन और पुलिस से जुड़े मामलों को लेकर आर्टिकल 226 के तहत हाई कोर्ट में पीआईएल दाखिल किया जा सकता है। किसी वकील की मदद या खुद हाई कोर्ट में हाई कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कर सकते हैं। निर्धारित फीस भी लगती है। विभिन्न राज्यों के लिए ई-फ़ाइलिंग पोर्टल भी अलग होता है।
मौलिक अधिकारों को लेकर या किसी नेशनल लेवल मुद्दे को लेकर आर्टिकल 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन- रिकॉर्ड के जरिए पीआईएल याचिका दायर की जा सकती है। इसके लिए ऑनलाइन ई-फाइलिंग “efiling.ecourts.gov.in” सुविधा भी SC देता है। पहले जरूरी जानकारी दर्ज करके रजिस्ट्रेशन करना होगा। यूजर नेम और पासवर्ड दर्ज करके लॉग इन करें। फिर जरूरी दस्तावेजों और सबूतों के साथ याचिका दायर करें।

