हाउसवाइफ़ क्यों कर रही है एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर? जानिए 3 बड़े कारण

आज के टाइम में कई हाउसवाइफ़ अपनी शादीशुदा ज़िंदगी से बाहर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की ओर झुकती हुई दिख रही है। जानिए ये तीन बड़े कारण जो बदल रहे हैं घर की महिलाओं की सोच।
Extra Marital Affair

जब हम किसी हाउसवाइफ़ की ज़िंदगी की बात करते हैं तो आम तौर पर हमारी सोच होती है कि वह अपने परिवार का ख्याल रखती है बच्चों के लिए पूरी तरह समर्पित होती है। लेकिन अब धीरे धीरे हाउस वाइफ़ की परिभाषा बदलती जा रही है। असल ज़िंदगी में देखा जाता है कि महिलाएँ अपनी शादीशुदा ज़िंदगी में भावनात्मक और मानसिक असंतोष महसूस करती है, यही कारण है एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के पैदा होने का।

हाल ही में एक्सपर्ट के अनुभव से ऐसा बताया गया है कि एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर सिर्फ़ शारीरिक आकर्षण के कारण पैदा नहीं होते हैं, बल्कि कई हाउस वाइफ़ का यह क़दम उनके जीवन में अधूरी इच्छाओं, अनसुनी भावनाओं और कहीं न कहीं अपनी पहचान की तलाश से जुड़ा होता है। आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसी तीन बड़े कारण बताएँगे जिनसे यह समझ जाएगा कि आख़िर महिलाएँ एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की ओर क्यों बढ़ती हैं।

ख़ुद को अनदेखा महसूस करना

अक्सर देखा जाता है कि शादीशुदा ज़िंदगी सिर्फ़ एक कर्तव्य बनकर रह जाती है। पति और पत्नी को लगता है कि अगर उनकी शादी हुई है तो उन्हें किसी भी तरह यह रिश्ता निभाना है। इस स्थिति में अक्सर भावनात्मक दूरी पैदा हो जाती है, पति और पत्नी के बीच बातचीत धीरे धीरे कम होने लगती है, कपल एक दूसरे पर ध्यान देना बंद कर देते हैं, अटेंशन न मिल पाना और भावनाओं को अपना समझ पाना महिलाओं को असुरक्षित महसूस कराता है।

जब हमने कुछ हाउस वाइफ़ से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि पत्नी का काम और बिज़नस इतना व्यस्त होता है कि उनके लिए घर की भावनात्मक ज़रूरतें पूरी ही नहीं हो पाती। एक्सपर्ट का कहना है कि जब घर में महिलाओं की भावनात्मक ज़रूरतें पूरी नहीं हो पाती है तू भी किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश करती हैं जो उन्हें समझ सके। इसका असर यह होता है कि महिलाएँ अपने जीवन में प्यार, सम्मान और इमोशनल सपोर्ट की कमी को भरने के लिए बाहर देखती है।

आत्म सम्मान की तलाश

अक्सर देखा जाता है कि कई हाउस वाइफ़ अपने आत्मसम्मान और पहचान को लेकर असुरक्षित महसूस करती है। कई महिलाओं ने अपने करियर या व्यक्तिगत रुचियों को परिवार की ज़िम्मेदारियों में खो दिया है। घर और परिवार की ज़िम्मेदारियों में ख़ुद को भुला देना महिलाओं में ख़ुद के आत्मसम्मान को होने जैसा है।

कुछ हाउस वाइफ़ ने हमें बताया की शादी के बाद उन्होंने अपना करियर छोड़ दिया, नौकरी छोड़ दी ताकि वे पूरा समय परिवार को दे सके। लेकिन उन्हें कई बार ऐसा महसूस होता है कि वे घर में रहती है तो इस बात से कोई भी उनकी क़दर नहीं करता है। ना पति से ज़्यादा टेंशन मिल पाती है, ना ही किसी तरह का मान सम्मान और प्यार।

मानसिक और भावनात्मक बैलेंस की कमी

आज के समय में तनाव और मानसिक दवाब महिलाओं को प्रभावित कर रहे हैं। दिन भर घर को संभालने और बच्चों की ज़िम्मेदारी या उठाने के बीच महिलाएँ अक्सर मानसिक और भावनात्मक संतुलन खो देती है।

कई हाउस वाइफ़ ऐसी हैं जो ख़ुद को अकेला और थका हुआ महसूस करती है। एक्सपोर्ट का कहना है कि मानसिक असंतोष और बोरिंग रिश्ता महिलाओं को नए रिश्तों की तरफ़ आकर्षित करता है। हालाँकि इस क़दम का मतलब रोमांस नहीं है, बल्कि सहारा और समझदारी की तलाश करना है।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
Follow Us :GoogleNews