सरोजिनी नगर मार्केट का नाम कैसे पड़ा? जानिए इस मशहूर जगह का रोचक इतिहास

दिल्ली का सरोजिनी नगर मार्केट आज फैशन लवर्स की पहली पसंद है, लेकिन क्या आप जानते हैं इसका नाम कैसे पड़ा? आज हम आपको बताएंगे कि देश की आज़ादी और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ी इस जगह के नाम के पीछे कौन सी प्रेरणादायक कहानी छुपी है।
Sarojini Nagar Market

दिल्ली की सरोजिनी नगर मार्केट सिर्फ सस्ती और ट्रेंडी शॉपिंग के लिए ही मशहूर नहीं है, बल्कि इसके नाम के पीछे एक बेहद गर्व से भरी कहानी भी है। आज लाखों लोग यहां खरीदारी करने आते हैं, लेकिन शायद कम ही लोग जानते हैं कि इस मार्केट का नाम भारत की एक महान स्वतंत्रता सेनानी और कवयित्री के नाम पर रखा गया है।

सरोजिनी नगर, जिसे पहले ‘विनय नगर’ कहा जाता था, का नाम 1947 के बाद बदलकर ‘सरोजिनी नगर’ कर दिया गया। यह नाम भारत को आज़ादी दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली सरोजिनी नायडू के सम्मान में रखा गया था।

सरोजिनी नगर मार्केट का इतिहास और महत्व

पहले था ‘विनय नगर’

आज जहां सरोजिनी नगर मार्केट है, वहां 1940 के दशक में एक कॉलोनी बसाई गई थी, जिसे ‘विनय नगर’ कहा जाता था। आज़ादी के बाद सरकार ने इसका नाम बदलकर सरोजिनी नायडू के नाम पर रख दिया, ताकि उनके योगदान को याद रखा जा सके।

सरोजिनी नायडू का योगदान

सरोजिनी नायडू को ‘भारत कोकिला’ कहा जाता है। वे स्वतंत्रता आंदोलन में महात्मा गांधी की करीबी सहयोगी रहीं और साल 1947 में उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल बनीं। उनकी कविताएं और भाषण आज भी प्रेरणा देते हैं।

मार्केट का आज का स्वरूप

समय के साथ सरोजिनी नगर सिर्फ एक रिहायशी इलाका नहीं रहा, बल्कि देश-विदेश में मशहूर शॉपिंग हब बन गया। यहां आपको ब्रांडेड से लेकर लोकल प्रोडक्ट्स तक बेहद किफायती दामों पर मिल जाते हैं। खासतौर पर युवाओं के लिए यह जगह फैशन का सबसे पसंदीदा ठिकाना है।

Bhawna Choubey
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