रोज़ाना लाखों लोग करते हैं इन Sign Languages का इस्तेमाल, जानें कौन-सी हैं सबसे लोकप्रिय

Sign Languages: सांकेतिक भाषा हाथों के इशारों और चेहरे के हाव-भाव से होने वाली बातचीत है। दुनियाभर में करोड़ों लोग इसी भाषा से अपनी बात कहते और समझते हैं। आइए जानते हैं कौन-सी सांकेतिक भाषाएँ सबसे ज्यादा बोली जाती हैं और क्यों इनका महत्व इतना बढ़ गया है।
Sign Languages

कभी आपने सोचा है कि अगर किसी इंसान को सुनने या बोलने में दिक्कत हो, तो वो अपनी बात कैसे बताएगा? जवाब है, सांकेतिक भाषा (Sign Languages) । ये भाषा उन लोगों की आवाज़ है, जो सुन या बोल नहीं सकते। हाथों के इशारे, उंगलियों की हरकत और चेहरे के हाव-भाव से ये भाषा पूरी तरह समझी जाती है।

आज के समय में दुनिया के हर देश ने अपनी-अपनी सांकेतिक भाषा बनाई है। हर भाषा उस देश की संस्कृति और समाज को दर्शाती है। चलिए जानते हैं कि दुनिया में कौन-सी सांकेतिक भाषाएँ सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती हैं और कितने लोग इन्हें बोलते हैं।

सांकेतिक भाषा क्यों ज़रूरी है?

सांकेतिक भाषा सिर्फ बधिर लोगों के लिए नहीं, बल्कि उनके परिवार और दोस्तों के लिए भी उतनी ही ज़रूरी है। ये संवाद का पुल है, जिससे लोग आपस में जुड़ पाते हैं। कई देशों में इसे आधिकारिक भाषा का दर्जा भी मिला है। यही वजह है कि अब स्कूल, कॉलेज और ट्रेनिंग सेंटर्स में भी सांकेतिक भाषा सिखाई जाने लगी है।

दुनिया की सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली सांकेतिक भाषाएँ

1. अमेरिकन साइन लैंग्वेज (ASL)

अमेरिका और कनाडा में सबसे ज्यादा लोग ASL का इस्तेमाल करते हैं। करीब 5 लाख लोग इस भाषा को बोलते हैं। इसमें हाथों के इशारे और चेहरे के हाव-भाव दोनों बहुत मायने रखते हैं।

2. ब्रिटिश साइन लैंग्वेज (BSL)

यूके में सबसे ज्यादा चलने वाली सांकेतिक भाषा है BSL। इसे करीब 1.25 लाख लोग अपनी पहली भाषा मानते हैं। मज़ेदार बात ये है कि ASL और BSL अलग-अलग हैं, यानी अमेरिका और ब्रिटेन के लोग एक-दूसरे की सांकेतिक भाषा नहीं समझ पाते।

3. इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL)

भारत में सुनने की समस्या से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए ISL बहुत बड़ी राहत है। हाल के सालों में इसे ज्यादा मान्यता मिली है। कई संस्थान अब इसे पढ़ा और सिखा रहे हैं ताकि बधिर लोगों को शिक्षा और रोज़गार में मदद मिल सके।

4. चीनी साइन लैंग्वेज (CSL)

चीन की आबादी बहुत बड़ी है, इसलिए यहां CSL का इस्तेमाल करने वालों की संख्या भी लाखों में है। ये भाषा चीनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी हुई है, इसलिए इसमें खास लोकल अंदाज़ नजर आता है।

5. फ्रेंच साइन लैंग्वेज (LSF)

फ्रांस की ये भाषा ऐतिहासिक है। दिलचस्प बात ये है कि इसी भाषा से बाद में अमेरिकन साइन लैंग्वेज की नींव रखी गई। आज भी फ्रांस और यूरोप के कई देशों में ये काफी प्रचलित है।

सांकेतिक भाषा का असर

सांकेतिक भाषा लोगों को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाती है। इससे न सिर्फ शिक्षा और नौकरी के मौके बढ़ते हैं बल्कि समाज में बराबरी की भावना भी आती है। आजकल कई बड़े इवेंट्स और सरकारी कार्यक्रमों में भी दुभाषिए मौजूद रहते हैं, ताकि हर कोई जुड़ा महसूस करे।

भविष्य में सांकेतिक भाषाओं की भूमिका

अब टेक्नोलॉजी ने भी इस क्षेत्र में कदम रख लिया है। ऐसे मोबाइल ऐप और AI टूल्स आ रहे हैं जो हाथों के इशारों को टेक्स्ट और आवाज़ में बदल देते हैं। आने वाले वक्त में इससे सांकेतिक भाषाओं का इस्तेमाल और बढ़ेगा और बधिर समुदाय के लिए नए रास्ते खुलेंगे।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि सच को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ समाज तक पहुंचाने का माध्यम है। तथ्यों की पड़ताल, महत्वपूर्ण मुद्दों को समझना और निष्पक्ष खबरों के जरिए लोगों की आवाज़ बनना मेरी पत्रकारिता की पहचान है। View all posts by Bhawna Choubey →
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