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भारत की वो जगहे जहाँ हर कोई नहीं जा सकता, विदेशी हो या भारतीय हर किसी को लेनी पड़ती है सरकार से परमिशन!

Written by:Ronak Namdev
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भारत में कुछ ऐसी खास जगहें हैं, जिनकी सुंदरता और महत्व के बावजूद हर कोई नहीं जा सकता। इन जगहों पर जाने के लिए भारतीयों और विदेशियों को सरकार से खास परमिट लेना पड़ता है। जानिए इन जगहों और नियमों की पूरी कहानी।
भारत की वो जगहे जहाँ हर कोई नहीं जा सकता, विदेशी हो या भारतीय हर किसी को लेनी पड़ती है सरकार से परमिशन!

भारत में कई ऐसी जगहें हैं, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, सांस्कृतिक धरोहर या सामरिक महत्व के लिए जानी जाती हैं। लेकिन इन तक पहुंचना आसान नहीं, क्योंकि ये इलाके या तो सीमा के पास हैं, आदिवासी समुदायों के लिए संरक्षित हैं, या सैन्य कारणों से बंद हैं।

भारत की वो जगहें जहां हर कोई नहीं जा सकता, लेनी पड़ती है सरकार से परमिशन। इनमें अरुणाचल प्रदेश की हसीन वादियां, लक्षद्वीप के नीले समुद्र तट, नागालैंड की जनजातीय संस्कृति, मिजोरम के पहाड़, सिक्किम और लद्दाख के बॉर्डर एरियाज, और अंडमान-निकोबार के कुछ द्वीप शामिल हैं। इन जगहों पर जाने के लिए भारतीयों को इनर लाइन परमिट (ILP) और विदेशियों को प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) या रेस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट (RAP) लेना होता है। आइए, इन जगहों और परमिट प्रक्रिया की डिटेल्स जानते हैं।

अरुणाचल प्रदेश: उगते सूरज की धरती

अरुणाचल प्रदेश, जिसे “उगते सूरज की भूमि” कहते हैं, चीन, भूटान और म्यांमार से सटा है। तवांग मॉनेस्ट्री, जिरो वैली और सेला पास जैसे इलाके अपनी खूबसूरती के लिए मशहूर हैं। लेकिन सामरिक संवेदनशीलता की वजह से भारतीयों को इनर लाइन परमिट (ILP) और विदेशियों को प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) लेना जरूरी है। ILP दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी, शिलांग या अरुणाचल सरकार की वेबसाइट ilp.arunachal.gov.in से ऑनलाइन मिलता है। विदेशियों को PAP भारतीय दूतावास या FRRO से लेना होता है। परमिट 30 दिन तक वैलिड रहता है और तवांग, रोइंग, पासीघाट जैसे इलाकों के लिए जरूरी है।

लक्षद्वीप: समुद्र का स्वर्ग

लक्षद्वीप के नीले समुद्र तट और प्राचीन बीच इसे स्वर्ग बनाते हैं। लेकिन आदिवासी संस्कृति और नौसेना बेस की वजह से सिर्फ कुछ द्वीप जैसे अगात्ती, बंगाराम और कदमत पर्यटकों के लिए खुले हैं। भारतीयों और विदेशियों, दोनों को लक्षद्वीप प्रशासन से परमिट लेना होता है, जो कोच्चि के विलिंग्डन आइलैंड ऑफिस या वेबसाइट lakshadweep.gov.in से ऑनलाइन मिलता है। परमिट 5 महीने तक वैलिड रहता है। बिना परमिट के प्रवेश गैर-कानूनी है, और सख्त चेकिंग होती है।

नागालैंड और मिजोरम के कोहिमा, डिमापुर और मोकोकचुंग

नागालैंड, अपनी 16 जनजातियों और हॉर्नबिल फेस्टिवल के लिए जाना जाता है, म्यांमार की सीमा से सटा है। कोहिमा, डिमापुर और मोकोकचुंग जैसे इलाकों के लिए भारतीयों को ILP चाहिए, जो कोलकाता, गुवाहाटी, शिलांग, सिलचर या दीमापुर हवाई अड्डे पर मिलता है। विदेशियों को PAP भारतीय दूतावास से लेना होता है। परमिट 15 दिन (अस्थायी) या 6 महीने (रेगुलर) के लिए वैलिड है। मिजोरम, जो म्यांमार और बांग्लादेश से सटा है, फॉन्गपुई हिल्स और वंतावांग फॉल्स के लिए मशहूर है। ILP गुवाहाटी, कोलकाता या आइजॉल के लेंगपुई हवाई अड्डे पर मिलता है। विदेशियों को PAP चाहिए, और वैलिडिटी 15 दिन से 6 महीने तक है।

सिक्किम और लद्दाख: बॉर्डर की हसीन वादियां

सिक्किम के नाथुला पास, गुरुडोंगमार झील, युमथांग वैली और त्सोमगो-बाबा मंदिर जैसे इलाके चीन और भूटान की सीमा से सटे हैं। भारतीयों को सिक्किम टूरिज्म एंड सिविल एविएशन डिपार्टमेंट से ILP चाहिए, जो बागडोगरा हवाई अड्डे या रंगपो चेकपोस्ट पर मिलता है। विदेशियों को RAP भारतीय दूतावास से लेना होता है। लद्दाख में नुब्रा वैली, पांगोंग त्सो, त्सो मोरिरी और खारदुंग ला जैसे इलाके पाकिस्तान और चीन की सीमा से सटे हैं। भारतीयों को ILP श्रीनगर, लेह या वेबसाइट leh.nic.in से मिलता है। विदेशियों को PAP चाहिए। 2021 में कुछ इलाकों से ILP हटाया गया, लेकिन न्योमा, दाह और हनु जैसे क्षेत्रों के लिए अभी भी परमिट जरूरी है।

अंडमान-निकोबार: आदिवासी और सैन्य सुरक्षा

अंडमान और निकोबार की खूबसूरती बेमिसाल है, लेकिन निकोबार और नॉर्थ सेंटिनल आइलैंड पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। निकोबार में निकोबारी और शोम्पेन जनजातियों की रक्षा के लिए पर्यटकों का जाना मना है। नॉर्थ सेंटिनल में सेंटिनलीज जनजाति रहती है, जो बाहरी दुनिया से संपर्क नहीं चाहती। 2018 में एक अमेरिकी पर्यटक की हत्या के बाद इस द्वीप के 4 किमी दायरे में प्रवेश बैन है। पोर्ट ब्लेयर, हैवलॉक और नील जैसे द्वीपों के लिए विदेशियों को RAP चाहिए, जो पोर्ट ब्लेयर हवाई अड्डे पर मिलता है। भारतीयों को निकोबार को छोड़कर ज्यादातर जगहों पर परमिट की जरूरत नहीं।

परमिट की जरूरत क्यों

इन जगहों पर परमिट की जरूरत सामरिक सुरक्षा, आदिवासी समुदायों की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए है। परमिट सिस्टम सुनिश्चित करता है कि इन जगहों पर अनधिकृत प्रवेश न हो और स्थानीय संस्कृति व पर्यावरण सुरक्षित रहे।

Ronak Namdev
लेखक के बारे में
मैं रौनक नामदेव, एक लेखक जो अपनी कलम से विचारों को साकार करता है। मुझे लगता है कि शब्दों में वो जादू है जो समाज को बदल सकता है, और यही मेरा मकसद है - सही बात को सही ढंग से लोगों तक पहुँचाना। मैंने अपनी शिक्षा DCA, BCA और MCA मे पुर्ण की है, तो तकनीक मेरा आधार है और लेखन मेरा जुनून हैं । मेरे लिए हर कहानी, हर विचार एक मौका है दुनिया को कुछ नया देने का । View all posts by Ronak Namdev
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