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3-3-3 फॉर्मूला: दिमाग को रिबूट करने का मनोवैज्ञानिक तरीका, जानिए क्या है मनोविज्ञान की ये ग्राउंडिंग टेक्नीक

Written by:Shruty Kushwaha
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मनोविज्ञान और संचार के क्षेत्र में “तीन का नियम” एक शक्तिशाली सिद्धांत है। हमारे दिमाग को तीन चीजें आसानी से याद रहती हैं और यह संख्या पैटर्न बनाने के लिए सबसे छोटी और प्रभावी इकाई है। इस फॉर्मूला की खूबसूरती इसकी सादगी में है क्योंकि आप इसे किसी भी समय, किसी भी जगह आजमा सकते हैं। 
3-3-3 फॉर्मूला: दिमाग को रिबूट करने का मनोवैज्ञानिक तरीका, जानिए क्या है मनोविज्ञान की ये ग्राउंडिंग टेक्नीक

AI generated

क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि आपका दिमाग चिंताओं के भंवर में फंस गया है? ऑफिस की डेडलाइन, घर की जिम्मेदारियां या दुनिया की उथल-पुथल ने तनाव का पहाड़ खड़ा कर दिया है। या आप किसी इंटरव्यू हॉल में हैं और हाथ पसीने से भीगे गए हैं, दिल की धड़कनें बढ़ रही हैं और दिमाग जैसे शोर से भर गया है। ऐसा लग रहा है जैसे आप खुद से दूर हो रहे हैं। ऐसे में अगर कोई आपसे कहे कि बस तीन चीज़ें देखो, तीन चीज़ें छुओ और तीन आवाज़ें सुनो और सब सामान्य हो जाएगा… क्या आप यकीन करेंगे?

मनोविज्ञान की दुनिया में इसे ही कहते हैं ‘3-3-3 फॉर्मूला’। ये एक सरल लेकिन गहराई से जुड़ी मानसिक तकनीक है जो एंग्ज़ायटी, पैनिक अटैक और बहुत ज्यादा तनाव के पलों में तुरंत राहत देती है। पिछले कुछ समय में ये सोशल मीडिया पर भी खासी वायरल हुई है।

क्या है 3-3-3 फॉर्मूला

3-3-3 फॉर्मूला एक ग्राउंडिंग तकनीक है, जिसका उद्देश्य होता है व्यक्ति को “अब और यहाँ” यानी कि Present moment में वापस लाना। यह आपके sensory system को सक्रिय करके मस्तिष्क को इस बात का संकेत देता है कि आप सुरक्षित हैं। इसे मनोवैज्ञानिकों ने चिंता या तनाव को तुरंत नियंत्रित करने के लिए विकसित किया है। यह तकनीक आपके दिमाग को भटकती चिंताओं से हटाकर वर्तमान क्षण में लाने का काम करती है। यह तकनीक इतनी आसान है कि इसे कहीं भी, कभी भी किया जा सकता है। चाहे आप ट्रैफिक में फंसे हों, मीटिंग के लिए इंतजार कर रहे हों या रात को बिस्तर पर लेटे हुए किसी चिंता से घिरे हों।

कैसे काम करती है ये तकनीक

ये तकनीक एक सरल माइंडफुलनेस तकनीक है जिसमें तीन चीजें देखना, तीन चीजें सुनना और अपने शरीर के तीन हिस्सों को हिलाना शामिल है. यह तकनीक चिंता को कम करने और अपने मन को शांत करने में मदद करती है। इसे करने के लिए आपको तीन आसान कदम उठाने होते हैं:

  • तीन चीजें देखें: अपने आसपास की तीन चीजों को ध्यान से देखें। अपने आसपास देखें और तीन ऐसी वस्तुएं पहचानें जिन्हें आप स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। जैसे सामने की दीवार पर टंगी घड़ी, मेज पर रखा कॉफी कप, और खिड़की के बाहर का पेड़। इनका रंग, आकार, बनावट हर बारीकी पर ध्यान दें।
  • तीन आवाजें सुनें: अपने कानों को खुला रखें और तीन अलग-अलग आवाजों को पहचानें। यह हवा का झोंका हो सकता है, किसी मशीन की हल्की गूंज या फिर दूर से आती किसी गाड़ी की आवाज।
  • तीन अंगों को हिलाएं: अपने शरीर के तीन हिस्सों को हिलाएं। जैसे, अपनी कलाई घुमाएं, टखने को हिलाएं, या सिर को हल्का-सा झुकाएं।

कैसे काम करता है यह फॉर्मूला

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार..चिंता अक्सर तब होती है जब हमारा दिमाग भविष्य की अनिश्चितताओं या अतीत की गलतियों में उलझ जाता है। 3-3-3 फॉर्मूला आपके ध्यान को वर्तमान में लाकर इन नकारात्मक विचारों को रोकता है। इसके पीछे का विज्ञान काफी रोचक है। हमारा दिमाग एक समय में सीमित चीजों पर ही ध्यान दे सकता है। जब आप अपनी इंद्रियों (दृष्टि, श्रवण और स्पर्श) को सक्रिय करते हैं तो ‘चिंता’ को वह ध्यान नहीं मिलता जिससे वह अपने आप कम होने लगती है। यह तकनीक माइंडफुलनेस को बढ़ावा देती है, जो तनाव को कम करने का एक सिद्ध तरीका है। तो अगर अगली बार आपको भी कोई चिंता घेर ले या किसी तनाव में फँस जाए तो इस तकनीक का इस्तेमाल करके ज़रूर देखिएगा।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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