
एयरपोर्ट की शुरुआत 20वीं सदी में हुई थी। बता दें कि फ्लाइट बाकी अन्य सभी संसाधनों से बहुत ही ज्यादा महंगा है, लेकिन इसमें सफर करने से लोगों के समय की बचत होती है। फ्लाइट में सफर करना आमतौर बहुत महंगा होता है, जिसे हर कोई एफोर्ड नहीं कर पाता है। यह व्यापार के साथ-साथ इंटरनेशनल नेटवर्क को भी मजबूत कनेक्टिविटी प्रदान करता है। एयरपोर्ट पर लोगों को एक से बढ़कर एक अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। चेकिंग के लिए यहां 3 से 4 घंटे का समय लगता है। इसलिए यात्रा से इतने घंटे पहले लोगों को एयरपोर्ट आना पड़ता है। दरअसल, हवाई सफर सुनने में जितना आसान लगता है, असल में उतना होता नहीं है। कई बार अनजाने में ऐसी भारी मिस्टेक हो जाती है, जिसका नतीजा भूगतना काफी कठिन हो जाता है।
एयरपोर्ट के छोटे-छोटे नियमों की अनदेखी कभी-कभी बहुत भारी पड़ जाती है। जरा-सी चूक पर एयरलाइंस बोर्डिंग रोक देती हैं और फिर सारी मेहनत बेकार हो जाती है। इसलिए जरूरी है कि इन छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज न किया जाए, जिससे आपको कोई परेशानी नहीं आएगी।
ना करें ये गलतियां
- अक्सर लोग टाइम पर एयरपोर्ट पहुंच जाते हैं, चेक-इन भी कर लेते हैं, लेकिन फिर आराम से कॉफी पीने, खरीदारी करने या सेल्फी लेने में वक्त गवां देते हैं। ऐसे में जब तक गेट तक पहुंचते हैं, तब तक बोर्डिंग बंद हो चुकी होती है। ज्यादातर एयरलाइंस उड़ान से 20-25 मिनट पहले गेट बंद कर देती हैं। ऐसे में देर से पहुंचना मतलब फ्लाइट छूटना तय है, इसलिए सबसे पहले गेट तक पहुंचें, फिर बाकी काम करें।
- अगर आप थोड़े भी नशे में हैं या बीमार हैं, तो एयरलाइन आपको रोक सकती है। यह सुरक्षा नियमों के तहत आता है। कई बार लोग सोचते हैं कि थोड़ा-सा पिया है, कौन देखेगा, लेकिन फ्लाइट स्टाफ तुरंत पहचान लेता है। इसी तरह खांसी-जुकाम या तेज बुखार में भी रोक दी जाती है। इसलिए फ्लाइट से पहले अपनी हालत पर ध्यान दें।
- कैबिन बैग या हैंडबैग का वजन तय सीमा से ज्यादा हुआ तो गेट पर ही रोक दिया जाएगा। कई बार यात्रियों को कहा जाता है कि बैग को चेक-इन कराएं, लेकिन अगर कोई झगड़ा करने लगे तो सीधा बोर्डिंग कैंसिल। हर एयरलाइन के नियम अलग होते हैं, इसलिए फ्लाइट से पहले अपने बैग का वजन और साइज जरूर जांच लें।
- बोर्डिंग पास मिलना ही काफी नहीं होता है। वैलिड आईडी, पासपोर्ट, वीजा और कभी-कभी वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट तक जरूरी होते हैं। अगर इन दस्तावेजों में नाम की स्पेलिंग टिकट से मेल नहीं खाती या पासपोर्ट एक्सपायर है, तो बोर्डिंग कैंसिल कर दी जाती है। खासकर अंतरराष्ट्रीय यात्राओं में पासपोर्ट कम से कम 6 महीने वैध होना चाहिए।
- बड़े एयरपोर्ट्स पर गेट बदलना आम बात है। कई बार यात्री मोबाइल में बिजी रहते हैं और नई घोषणा सुन नहीं पाते। ऐसे में वह गलत गेट पर बैठ जाते हैं और फ्लाइट निकल जाती है। इसलिए एयरपोर्ट स्क्रीन या मोबाइल ऐप पर नजर बनाए रखें।
- कई यात्री जल्दी अंदर जाने या सीट बदलवाने की कोशिश में स्टाफ से उलझ जाते हैं। एयरलाइन ऐसे यात्रियों को डिसरप्टिव पैसेंजर घोषित कर सकती है और बोर्डिंग रोक सकती है।
- ऑनलाइन टिकट बुक करते वक्त कई बार पेमेंट तो कट जाती है, लेकिन सीट कन्फर्म नहीं होती। फिर गेट पर जाकर पता चलता है कि टिकट ही पेंडिंग है। इससे बचने के लिए उड़ान से 24 घंटे पहले एयरलाइन की वेबसाइट या ऐप से कन्फर्मेशन जरूर कर लें।
शांति से लें काम
अगर किसी वजह से एयरलाइन आपको बोर्डिंग से मना करे तो घबराएं नहीं। शांत रहकर काउंटर पर जाएं और इसकी वजह पूछें। अगर गलती एयरलाइन की है, तो वे या तो अगली फ्लाइट में सीट देंगे या पैसे लौटाएंगे। सभी रसीदें और बातचीत के रिकॉर्ड संभाल कर रखें, यह बाद में आपके काम आएंगे। बता दें कि घरेलू फ्लाइट के लिए कम से कम 2 घंटे और इंटरनेशनल के लिए 3 घंटे पहले एयरपोर्ट पहुंचना जरूरी होता है। इसलिए कोशिश करें कि वक्त से थोड़ा पहले पहुंचें, जिससे किसी चीज की कोई टेंशन नहीं रहेगी।
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

