
भारत की पहचान गांव से होती है, यहां के लोग अक्सर खेती-बाड़ी, पशुपालन, मत्स्य पालन इत्यादि पर निर्भर रहते हैं। मिट्टी के घरों में रहने वाले सभी लोग एक-दूसरे से मिलजुल कर गांव की हर एक परंपरा को निभाते हैं। इन सभी के अलग-अलग नाम भी रखे जाते हैं। हालांकि समय के साथ गांव के रहन-सहन में भी काफी ज्यादा बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले यहां दीपक जलाकर रात के समय महिलाएं अपने घरों को रोशन किया करती थीं। वहीं, अब लगभग सभी गांव में बिजली कनेक्शन पहुंच चुका है। यदि आप कभी गांव में गए हो या वहां रहते हो तो अपने लोगों को कुएं का पानी पीते हुए देखा होगा, जिसका सदियों पुराना इतिहास है। यूं तो हर शहर की अपनी अलग-अलग पहचान होती है। कुछ खान-पान के लिए जानी जाती है, तो कुछ अपने साथ ऐतिहासिक धरोहर समेटे हुए हैं। कुछ समुद्री लहरों के लिए विश्व भर में प्रख्यात है, तो कुछ पहाड़ की वादियां शांत माहौल लोगों को प्रदान करती है।
आज हम आपको ऐसे ही कुछ अनोखे गांवों के बारे में बताएंगे, जो आपको इस राज्य की उस दुनिया में ले जाएंगे, जो न किसी फाइव स्टार होटल में मिलेगी और न किसी शहर की भीड़भाड़ में मिल सकती है।
राजस्थान (Rajasthan)
हालांकि, आज हम कुछ ऐसी ही घूमने वाले गांवों से रुबरू करवाने जा रहे हैं, जिसे आपको अवश्य ही एक्सप्लोर करना चाहिए। दरअसल, हम आपको राजस्थान के गांवों की खासियत बताने वाले हैं। आमतौर पर राजस्थान का नाम आते ही आंखों के सामने ऊंचे-ऊंचे किले, भव्य महल और सुनहरी रेत के टीले उभर आते हैं, लेकिन इस बार अगर आप राजस्थान घूमने का मन बना रहे हैं तो इन गांवों में जाएं, जहां परंपरा अब भी जिंदा है। यहां की मिट्टी में एक अलग ही अपनापन है। ये गांव खूबसूरती के साथ सादगी के लिए भी मशहूर हैं।
देवमाली
राजस्थान का देवमाली गांव बाकी गांवों से बिल्कुल अलग है। अरावली की गोद में बसा यह गांव अपनी पवित्रता और आस्था के लिए जाना जाता है। यहां के लोगों का मानना है कि यह भूमि भगवान देवनारायण की है, इसलिए यहां मांस, शराब और किसी तरह के अपराध की कोई गुंजाइश नहीं है। आज तक इस गांव में चोरी की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई। यहां के लोग अपने घरों में ताले तक नहीं लगाते।
गांव के सारे मकान मिट्टी के बने हैं और उनकी छतें छप्पर की होती हैं। कोई पक्के घर नहीं बनवाता, क्योंकि लोगों का विश्वास है कि यह भूमि देव की है और मिट्टी के घर ही उसकी परंपरा का हिस्सा हैं।
मेनार
उदयपुर से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित मेनार गांव को बर्ड विलेज कहा जाता है। यह उन कुछ जगहों में से है जहां इंसान और पक्षी दोनों एक साथ रहते हैं। यहां के तालाब सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षियों का घर बन जाते हैं। करीब 250 से अधिक प्रजातियों के पक्षी यहां देखे जा सकते हैं। सरकार ने इन तालाबों को वेटलैंड घोषित किया है। पक्षियों की चहचहाहट, ग्रामीणों का सादा जीवन और राजस्थानी व्यंजनों की खुशबू मिलकर इस गांव को बेहद खास बना देते हैं। जो लोग फोटोग्राफी, प्रकृति और शांति पसंद करते हैं, उनके लिए मेनार किसी जन्नत से कम नहीं।
बिश्नोई
जोधपुर से करीब 22 किलोमीटर की दूरी पर बसे बिश्नोई गांव को ग्रीन विलेज कहा जाता है। यहां के लोग प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा के लिए जाने जाते हैं। पेड़ काटना या जानवरों को नुकसान पहुंचाना यहां पाप माना जाता है। बिश्नोई समाज के लोग सदियों से पर्यावरण की रक्षा में लगे हैं।
गांव में कुम्हार, बुनकर और चरखी पर काम करते हुए कारीगर आपको पारंपरिक कला की झलक दिखा देंगे। यहां आने वाले सैलानी बिश्नोई विलेज सफारी के जरिए गांव की जीवनशैली को करीब से समझ सकते हैं। गुड़ा बिश्नोई झील के किनारे बैठकर ढलते सूरज को देखना अलग ही एहसास दिलाता है।
खुरी
जैसलमेर के पास स्थित खुरी गांव रेत के विशाल टीलों और पारंपरिक जीवनशैली के लिए मशहूर है। मिट्टी और फूस से बने घर, ऊंट की सवारी, लोक संगीत और लोक नृत्य पर्यटकों के लिए बेस्ट डेस्टीनेशन बन जाता है। गांव के पास एक राष्ट्रीय उद्यान भी है, जहां पक्षियों और वन्यजीवों को नजदीक से देखा जा सकता है।
जवाई
राजस्थान का जवाई गांव शायद राज्य का सबसे रहस्यमयी और रोमांचक गांव है। यह जगह ‘लेपर्ड हिल्स ऑफ इंडिया’ के नाम से जानी जाती है, क्योंकि यहां के जंगलों में बड़ी संख्या में तेंदुए रहते हैं। जवाई नदी के किनारे बसे इस गांव में वन्यजीव, गुफाएं और बर्ड वॉचिंग देखने को मिलेगा।सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का नजारा मनमोहक होता है।
सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

