सेहत के लिए वरदान है सिंघाड़ा, फायदे जानकर आज से ही कर देंगे शुरू खाना

सिंघाड़ा शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। इसलिए आज से ही इसे अपनी डेली डाइट में शामिल कर लें। व्रत में सिंघाड़ा आटे के परांठे, हलवा, समोसा और पकौड़े भी बनाकर खाए जा सकते हैं।
Singhada

शरीर के लिए सिंघाड़ा फल किसी खजाने से कम नहीं है। बता दें कि यह जलीय फल है, जो कि स्वाद में लाजवाब होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। बारिश और शरद ऋतु में यह बाजारों में आसानी से मिल जाता है, जिसे उपवास या हल्का डाइट लेने वालों के लिए यह पसंदीदा विकल्प बन जाता है। सिंघाड़ा अपने आप में एनर्जी का भंडार है। इसे खाने से शरीर को तुरंत ताकत और ताजगी मिलती है। इसके अलावा, यह शरीर की गर्मी को नियंत्रित करने और पाचन शक्ति को मजबूत करने में मदद करता है।

ऐसे में यदि आप इस एनर्जेटिक फूड को अपनी डाइट का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो इसका आपको काफी लाभ पहुंचाने वाला है। इस बच्चे से लेकर बुजुर्ग हर कोई ट्राई कर सकता है।

पोषक तत्वों से भरपूर

सिंघाड़े में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। चिकित्सकों की मानें तो 100 ग्राम सिंघाड़े में लगभग 24 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 1.5 ग्राम प्रोटीन, 3 ग्राम फाइबर, 45 मिलीग्राम कैल्शियम, 90 मिलीग्राम फॉस्फोरस और 1 मिलीग्राम आयरन मौजूद होता है। इसे खाने से लगभग 70 से 75 प्रतिशत पानी की आपूर्ति होती है। यह शरीर को हाइड्रेट रखने का काम करता है।

फायदे

  • यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है, इसलिए इसे उपवास के दौरान खाया जाता है।
  • इसमें आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होती है जो थायरॉइड ग्रंथि को संतुलित रखती है।
  • पाचन क्रिया को बेहतर बनाने के लिए फाइबर की मौजूदगी काफी अहम है, जिससे कब्ज जैसी परेशानियों से बचाव होता है।
  • इसमें मौजूद एंटीऑक्सिडेंट और आयरन रक्त को साफ और स्वस्थ रखते हैं।
  • यह त्वचा की देखभाल में भी सहायक होता है।
  • गर्मी में शरीर को ठंडक पहुंचाता है।

आयुर्वेद में इसे बल्य और शीतल कहा गया है, जो शरीर की ताकत बढ़ाने और पित्त शमन करता है। यदि कोई भी व्यक्ति इसका नियमित सेवन करता है तो उसे डायरिया, मूत्र संबंधी रोग और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं से राहत मिलेगी। इसे बीमारियों को दूर रखने का देसी खजाना भी माना जाता है। ह शरीर की आंतरिक शक्ति को बढ़ाने और रोगों से लड़ने में भी मदद करता है। बता दें कि यह फल बाजार में आसानी से मिल भी जाता है।

नुकसान

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हर सिक्के के दो पहलु होते हैं, ऐसे में इस फल को खाने के फायदे हैं, तो इसके नुकसान भी हो सकते हैं। जरा सी लापरवाही आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। दरअसल, इसका अत्यधिक सेवन करने से कब्ज की समस्या हो सकती है। ऐसे में आपको बहुत ही लिमिट में इसे खाना चाहिए। ठंडी तासीर वाला फल होने के कारण आपको सर्दी, खांसी, बुखार भी हो सकता है।

रेसिपीज

  • कई लोग उपवास के दौरान फलों या साबुत अनाज के अलावा सिंघाड़े के आटे से बने पकवान को खाना पसंद करते हैं, जिससे उन्हें ऊर्जा और पोषण मिलता है। व्रत के दौरान एनर्जेटिक बने रहने के लिए लोग सिंघाड़े के आटे की पूरियां, हलवा और पकौड़े खाते हैं। शिवरात्रि जैसे त्योहारों पर तो इसे भोग प्रसाद में भी शामिल किया जाता है। खासतौर पर सिंघाड़े का हलवा परिवार में सबको पसंद आता है।
  • इसके अलावा, सिंघाड़े के आटे से परांठा भी बनाया जाता है। इसमें आलू, हरी मिर्च और धनिया पत्ती डालकर इसे और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। सिंघाड़ा आटा विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर होता है, जो पाचन को दुरुस्त रखता है, हड्डियों को मजबूत बनाता है। साथ ही शरीर में ऊर्जा को बरकराररा रखता है।
  • इन सबसे हटकर कुछ लोग सिंघाड़े के आटे का समोसा भी ट्राई करते हैं। इसे आलू, हरी मिर्च और धनिया के साथ भरकर बनाया जाता है। हल्का, कुरकुरा और भरपूर स्वाद वाला यह समोसा व्रत के दौरान एनर्जी को मेंटेन करता हैं।। इसके अलावा, सिंघाड़े के आटे और आलू से बने पकौड़े भी लोगों की पहली पसंद होती है। इन पकौड़ों को शुद्ध घी में तलकर तैयार किया जाता है, जिसे आप चाय या दही के साथ खा सकते हैं।

(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। MP Breaking News किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)

Sanjucta Pandit
लेखक के बारे में
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सीनियर कंटेंट राइटर · डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन, बीए. 2022 से MP Breaking News में; पहले लाइव इंडिया, VIP News Channel और Khabar Bharat में कार्य.

मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं। View all posts by Sanjucta Pandit →
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